कोलकाता, 21 जून पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा में पारित विश्वविद्यालय विधेयक उनके समक्ष रखा जाएगा, तो वह इस पर बिना किसी ‘भेदभाव या पूर्वाग्रह’ के विचार करेंगे। इस विधेयक में राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति बनाने का प्रावधान किया गया है।
धनखड़ ने दावा किया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पाया कि राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक भर्ती में गैर कानूनी हथकंडे अपनाए गए। उन्होंने कहा कि इसीलिए लोगों का ध्यान हटाने के लिए कानून लाए गए और पारित किए गए।
उन्होंने यहां राजभवन में मीडिया से कहा, ‘‘मैं इन विधेयकों पर कानूनी रूप से विचार करूंगा और संविधान के अनुसार शिक्षा समवर्ती सूची में है।’’
राज्यपाल ने कहा कि वह इन विधेयकों पर बिना किसी द्वेष, क्रोध या पूर्वाग्रह के उच्चतम न्यायालय के फैसलों के मद्देनजर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम के परिप्रेक्ष्य में विचार करेंगे।
उन्होंने कहा कि वह कानून के मुताबिक कार्रवाई करेंगे। समवर्ती सूची में संघ और राज्यों दोनों के समान हित के विषय शामिल हैं। इस सूची में शामिल विषयों पर संसद और राज्य विधायिका दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन एक ही विषय से संबंधित संघ और राज्य के कानून के बीच संघर्ष की स्थिति में, संघीय कानून राज्य के कानून पर हावी होता है। इसमें शिक्षा जैसा विषय शामिल हैं।
राज्य विधानसभा में चल रहे मानसून सत्र में राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति बनाने और राज्यपाल की जगह शिक्षा मंत्री को निजी विश्वविद्यालयों के विजिटर का दर्जा देने से संबंधित विधेयक पारित किए गए हैं।
धनखड़ ने कहा कि दिन में राजभवन में उनसे मिले विपक्षी भाजपा विधायकों ने उनसे कहा था कि तृणमूल कांग्रेस सरकार का उद्देश्य एक नया पद सृजित करना है, ताकि एक ही व्यक्ति को पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री और राज्यपाल बनाया जाये।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नहीं हो सकता। हम कानून द्वारा शासित समाज हैं। आपका राज्यपाल भारतीय संविधान और पश्चिम बंगाल के लोगों का सेवक है।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY