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9 जून की बड़ी खबरें और अपडेट्स

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं.

9 जून की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.शी जिनपिंग और किम जोंग उन ने संबंधों को मजबूत करने पर जताई सहमति

जर्मनी और फ्रांस ने रद्द किया साझा फाइटर जेट कार्यक्रम

शेयर बाजार में उतरेगी ओपनएआई, आईपीओ के लिए दाखिल किए दस्तावेज

आईसीसी के मुख्य अभियोजक करीम खान यौन शोषण के आरोपों में निलंबित

उज्ज्वला योजना वाले सिलेंडर की संख्या 9 से घटाकर 4 की गई

अमेरिका: अदालत ने एच-1बी वीजा शुल्क को किया रद्द, कहा-राष्ट्रपति को नया टैक्स लगाने का अधिकार नहीं

हंगरी में सांसदों के वेतन-भत्तों में भारी कटौती, संसद ने सर्वसम्मति से बिल पास किया

जर्मनी: बड़े महानगरों को पछाड़ एरफुर्ट बना देश का सबसे खुशहाल शहर

यूएन में भारत का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, "फितना अल-हिंदुस्तान" शब्द पर जताई कड़ी आपत्ति

फुटबॉल वर्ल्ड कप से पहले अमेरिका ने रद्द किया ईरान का टिकट आवंटन

साइबर हमलों से निपटने के लिए जर्मनी बनाएगा अपनी पहली 'एआई सुरक्षा एजेंसी'

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद साल 2025 में हुए सबसे ज्यादा सैन्य संघर्ष: रिपोर्ट

मध्य पूर्व शांति समझौता अंतिम चरण में: डॉनल्ड ट्रंप

स्पाइसजेट के कई पायलटों को मार्च से नहीं मिली सैलरी

भारत की विमानन कंपनी स्पाइसजेट इस वक्त भारी वित्तीय संकट से जूझ रही है और एयरलाइन के कई पायलटों को मार्च से समय पर वेतन नहीं मिला है. यह जानकारी समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दी है. एजेंसी द्वारा देखे गए आंतरिक व्हाट्सऐप संदेशों में पायलटों ने आर्थिक परेशानियों का जिक्र किया है. एयरलाइन ने स्वीकार किया कि वेतन भुगतान में देरी हुई है और कहा कि कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से भुगतान किया जा रहा है.

ईयू में जेट फ्यूल की कमी का खतरा, उड़ानें हो सकती हैं रद्द

एयरलाइन ने कहा है कि वह भारत सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत आपातकालीन कर्ज लेने की कोशिश कर रही है ताकि परिचालन को स्थिर किया जा सके. स्पाइसजेट के अनुसार पश्चिम एशिया संकट, बढ़ती ईंधन कीमतें और एयरस्पेस प्रतिबंधों ने उसकी नकदी स्थिति पर दबाव बढ़ाया है. कंपनी का कहना है कि अगले कुछ महीनों में स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

एक समय भारत की दूसरी सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन रही स्पाइसजेट की बाजार हिस्सेदारी 2019 के करीब 15 प्रतिशत से घटकर अब लगभग 3.4 प्रतिशत रह गई है. एयरलाइन की उड़ानों की संख्या में भी गिरावट आई है और उसके शेयर इस साल करीब 60 प्रतिशत गिर चुके हैं. भारतीय विमानन क्षेत्र में पहले भी किंगफिशर, जेट एयरवेज और गो फर्स्ट जैसी एयरलाइंस वित्तीय संकट के कारण बंद हो चुकी हैं.

यूरोपीय संघ यूक्रेन युद्ध लड़ने वाले रूसी सैनिकों की एंट्री पर लगा सकता है बैन

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को पर अंतरराष्ट्रीय दबाव को और अधिक बढ़ाने के लिए यूरोपीय कमीशन ने एक बेहद कड़े और ऐतिहासिक प्रतिबंध पैकेज का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में शामिल रहे सभी रूसी सैनिकों के यूरोपीय संघ (ईयू) में प्रवेश करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा. यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन ने मंगलवार को ब्रसेल्स में इस 21वें प्रतिबंध पैकेज को पेश करते हुए साफ शब्दों में कहा कि सीधे तौर पर यूक्रेन पर आक्रमण में भाग लेने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यूरोप के दरवाजे अब पूरी तरह बंद रहेंगे.

प्रस्ताव के तहत रूसी तेल पर लगाए गए 'प्राइस कैप' में होने वाले नियमित बदलावों को अगले साल जनवरी तक के लिए रोक दिया जाएगा ताकि तेल निर्यात से होने वाली रूस की कमाई को न्यूनतम स्तर पर रखा जा सके. ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि ईरान में जारी युद्ध के कारण दुनिया भर में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे प्राइस कैप में बदलाव करने पर रूस को ज्यादा फायदा मिल सकता था.

आर्थिक और वित्तीय मोर्चे पर शिकंजा कसते हुए यूरोपीय संघ ने 31 और रूसी बैंकों के साथ हर तरह के लेनदेन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और क्रिप्टो करेंसी के जरिए होने वाले गुप्त कूटनीतिक सौदों पर नकेल कसने का खाका तैयार किया है. इसके साथ ही, रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण धातुओं, मिश्र धातुओं और कुछ विशेष मछली उत्पादों के निर्यात पर भी कड़े प्रतिबंध लागू किए जाएंगे. इस फैसले से रूस के औद्योगिक और सैन्य उत्पादन क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, इस बेहद कड़े और व्यापक प्रतिबंध पैकेज को जमीन पर पूरी तरह प्रभावी ढंग से लागू करने से पहले अभी यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों से आधिकारिक और कानूनी मंजूरी मिलना बाकी है.

हंगरी में सांसदों के वेतन-भत्तों में भारी कटौती, संसद ने सर्वसम्मति से बिल पास किया

हंगरी की संसद ने सोमवार को सांसदों के वेतन और भत्तों में बड़ी कटौती के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी. प्रधानमंत्री पेटर मॉजार की सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक खर्च कम करने और सरकारी खजाने पर बोझ घटाने के लिए उठाया गया है. नए कानून के तहत सांसदों के मूल वेतन में 40 प्रतिशत की कमी होगी और यह अगले महीने से लागू होगा.

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नियमों के अनुसार सांसदों का मासिक वेतन घटकर करीब 3,690 यूरो रह जाएगा. इसके अलावा मोबाइल फोन बिल, कार्यालय किराया, आवास और स्टाफ भत्तों में भी कटौती की गई है. प्रधानमंत्री पेटर मॉजार ने कहा कि यह फैसला “संयम, विनम्रता और जनता के प्रति जिम्मेदारी” दिखाने के लिए लिया गया है. सरकार का दावा है कि इन उपायों से संसद के चार साल के कार्यकाल में एक साल के संचालन खर्च के बराबर बचत होगी.

इसी वर्ष अप्रैल में हुए आम चुनावों में उनकी 'तिसा पार्टी' ने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर राष्ट्रवादी नेता विक्टर ओरबान के 16 साल लंबे शासन का अंत कर दिया था. 45 वर्षीय मॉजार ने कार्यभार संभालते ही देश में व्यापक सुधारों का संकल्प लिया था.

जर्मनी: बड़े महानगरों को पछाड़ एरफुर्ट बना देश का सबसे खुशहाल शहर

जर्मनी के 40 सबसे बड़े शहरों में खुशहाली को लेकर किए गए देशव्यापी सर्वे 'एसकेएल हैप्पीनेस एटलस' में थुरिंजिया राज्य की राजधानी एरफुर्ट ने लंबी छलांग लगाते हुए देश के सबसे खुशहाल शहर का खिताब अपने नाम कर लिया है. वहीं, पिछले साल का नंबर वन शहर 'कासेल' इस बार लुढ़ककर सीधे 13वें स्थान पर पहुंच गया है. 'एलेन्सबाख इंस्टीट्यूट' द्वारा कराए गए इस सालाना सर्वे में एरफुर्ट ने 10 में से 7.74 का स्कोर हासिल कर पहला स्थान पाया है.

खुशहाली में क्यों पिछड़ गया जर्मनी?

जर्मनी का सातवां सबसे बड़ा शहर डुसेलडोर्फ इस सूची में तीसरे स्थान पर रहा, जबकि शीर्ष पांच के बाकी स्थानों पर ऑग्सबुर्ग, क्रेफेल्ड और कील जैसे छोटे शहरों का जलवा रहा. इसके विपरीत, जर्मनी के बड़े आर्थिक और राजनीतिक केंद्र खुशहाली के मामले में काफी पीछे छूट गए, जहां दूसरा सबसे बड़ा शहर हैम्बर्ग दसवें, म्यूनिख 24वें और देश की राजधानी बर्लिन सूची में बेहद नीचे 35वें स्थान पर रही. उत्तरी बंदरगाह शहर रोस्टोक 5.8 के स्कोर के साथ देश का सबसे नाखुश शहर दर्ज किया गया.

शोधकर्ताओं के अनुसार, एरफुर्ट जैसे छोटे और मध्यम शहरों की इस कामयाबी के पीछे कई महत्वपूर्ण स्थानीय और व्यावहारिक कारक जिम्मेदार हैं. बड़े महानगरों के मुकाबले इन शहरों में मकानों का किराया काफी कम और किफायती है, पर्यावरण की गुणवत्ता बेहद शानदार है और पूर्वी जर्मनी के अन्य शहरों की तुलना में यहां की आर्थिक स्थिति भी काफी मजबूत है.

यूएन में भारत का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, "फितना अल-हिंदुस्तान" शब्द पर जताई कड़ी आपत्ति

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पाकिस्तान द्वारा बलूचिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों को "फितना अल-हिंदुस्तान" कहना भारत विरोधी प्रचार को संस्थागत रूप देना है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सोमवार को भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि यह "धार्मिक शब्दावली में लिपटी सरकार प्रायोजित गलत सूचना और दुष्प्रचार" है.

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भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का "डीप स्टेट" अपने नागरिकों के बीच भारत के खिलाफ स्थायी दुश्मनी बनाए रखने के लिए नफरत का माहौल तैयार कर रहा है. भारत की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान सरकार की उस अधिसूचना के बाद आई, जिसमें 2025 में बलूचिस्तान में सक्रिय सभी आतंकी और उग्रवादी समूहों को "फितना अल-हिंदुस्तान" घोषित किया गया था.

इसके अलावा भारत ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई और हवाई हमलों की भी आलोचना की. पी. हरीश ने कहा, "किसी नरसंहार को सैन्य अभियान बताने से जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती. नागरिकों की हत्या, उन्हें घायल करना और बच्चों को अनाथ बनाना आतंकवाद विरोध नहीं है."

फुटबॉल वर्ल्ड कप से पहले अमेरिका ने रद्द किया ईरान का टिकट आवंटन

आगामी फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप शुरू होने से ठीक पहले ईरानी फुटबॉल संघ ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज मैचों के लिए उसे मिलने वाले टिकटों के कोटे को रद्द कर दिया गया है. ईरानी समाचार एजेंसी इस्ना के मुताबिक, फुटबॉल संघ ने अमेरिका पर लॉस एंजिल्स और सिएटल में होने वाले मैचों से ईरानी फैंस को दूर रखने का सीधा आरोप लगाया है. इस कार्रवाई के बाद ईरानी फुटबॉल संघ ने खेल की वैश्विक नियामक संस्था फीफा से इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है.

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फीफा के आधिकारिक नियमों के तहत वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाले प्रत्येक देश के फुटबॉल महासंघ को उन मैचों के कुल टिकटों का 8 फीसदी हिस्सा मिलता है, जिनमें उनकी राष्ट्रीय टीम खेल रही होती है. अमेरिकी सरकार के इस कड़े फैसले के कारण अब ग्रुप स्टेज के मैचों के दौरान स्टेडियमों में ईरानी प्रशंसकों की हिस्सेदारी पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है. अमेरिकी प्रशासन इसे अपनी सुरक्षा और घरेलू नीतियों का हिस्सा बता रहा है.

प्रशासनिक अड़चनों को देखते हुए ईरानी फुटबॉल टीम ने पहले ही अपना बेस अमेरिका से हटाकर मेक्सिको शिफ्ट कर लिया है. गौरतलब है कि इस बार वर्ल्ड कप की मेजबानी अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा संयुक्त रूप से कर रहे हैं. हालांकि अमेरिकी सरकार ने खेल नियमों का पालन करते हुए ईरानी फुटबॉल खिलाड़ियों को तो वीजा दे दिया था, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल के कई शीर्ष अधिकारियों और स्टाफ सदस्यों को वीजा देने से साफ इनकार कर दिया.

साइबर हमलों से निपटने के लिए जर्मनी बनाएगा अपनी पहली 'एआई सुरक्षा एजेंसी'

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते दुरुपयोग और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए जर्मन सरकार ने एक 'एआई सुरक्षा एजेंसी' स्थापित करने की घोषणा की है. जर्मन सरकार के प्रवक्ता ने सोमवार देर रात राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी. इस विशेष संस्थान का मुख्य उद्देश्य एडवांस एआई मॉडल्स की कार्यप्रणाली का बारीकी से परीक्षण करना और उनसे देश की सुरक्षा को होने वाले संभावित जोखिमों का पहले से आकलन करना होगा.

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यह नई सुरक्षा एजेंसी वैश्विक मोर्चे पर भी सक्रिय भूमिका निभाएगी. सरकार के अनुसार, यह संस्थान अन्य देशों में काम कर रहे इसी तरह के सुरक्षा संस्थानों के साथ सूचनाओं और खुफिया डेटा का आदान-प्रदान तेजी से बढ़ाएगा. जर्मनी का अंतिम लक्ष्य अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर एआई के सुरक्षित और जिम्मेदारी भरे उपयोग के लिए एक समान और सर्वमान्य मानक तैयार करना है, ताकि इस तकनीक के खतरों को कम किया जा सके.

बर्लिन द्वारा इस नई एजेंसी को बनाने का फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में एआई तकनीक से लैस साइबर हमलों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हैकर्स अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर साइबर हमलों में एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे ये हमले पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक, खतरनाक और विनाशकारी हो गए हैं. यही वजह है कि जर्मन सरकार को अपने साइबर डिफेंस और सुरक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

दुनिया की सबसे लंबी दो-तरफा सुरंग जोजिला का निर्माण अंतिम चरण में

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 11,578 फीट की ऊंचाई पर बनी 13.14 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग अब अपने आखिरी चरण (ब्रेकथ्रू) के करीब है. यह देश के इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक अहम पड़ाव होगा. जोजिला सुरंग दुनिया की सबसे लंबी दो लेन सुरंग है. इसके पूरा होने पर कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी बनी रहेगी, जिससे ट्रांसपोर्ट लिंक बेहतर होंगे और इस इलाके का रणनीतिक महत्व और मजबूत होगा.

यह प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग हिल स्टेशन के पास बालटाल और लद्दाख के द्रास जिले में मीनामार्ग के बीच जोजिला दर्रे वाले इलाके में बनाया जा रहा है. इसका मकसद भारत के सबसे मुश्किल हिमालयी रास्तों में से एक पर हर मौसम में कनेक्टिविटी देना है, जो भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और खराब मौसम की वजह से हर साल लंबे समय तक कटा रहता है. यह प्रोजेक्ट 1 अक्टूबर, 2020 को शुरू हुआ था.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद साल 2025 में हुए सबसे ज्यादा सैन्य संघर्ष: रिपोर्ट

पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो (पीआरआईओ) द्वारा मंगलवार को जारी की गई वार्षिक "कॉन्फ्लिक्ट ट्रेंड्स" रिपोर्ट में वैश्विक सुरक्षा को लेकर बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में दुनिया भर में विभिन्न देशों के बीच जितने सैन्य संघर्ष देखे गए, उतने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से इतिहास में कभी दर्ज नहीं किए गए थे. इसके साथ ही, शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि बीता साल 1990 के दशक में शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से अब तक का तीसरा सबसे घातक और सबसे ज्यादा मौतों वाला साल साबित हुआ है.

बर्लिन दीवार गिरने के बारे में अब क्या सोचते हैं जर्मन?

इस वैश्विक अशांति के बीच मध्य पूर्व दुनिया का तीसरा सबसे प्रभावित क्षेत्र बनकर उभरा है, जहां हिंसक झड़पों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. ओस्लो संस्थान की इस रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में राजकीय संघर्षों की संख्या साल 2024 के 10 से बढ़कर साल 2025 में 13 तक पहुंच गई है. रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि साल 1946 के बाद से मध्य पूर्व के पूरे क्षेत्र में दर्ज की गई सैन्य संघर्षों की यह अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक संख्या है.

एएफपी के मुताबिक, पीआरआईओ की मुख्य शोधकर्ता सिरी आस रुस्तद ने बेहद स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि अपनी मौजूदा सैन्य कार्रवाइयों के चलते इस्राएल इस समय निश्चित रूप से दुनिया के सबसे आक्रामक देशों में से एक बनकर उभरा है, जिसने मध्य पूर्व की स्थिति को सबसे ज्यादा विस्फोटक बनाने का काम किया है.

द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के 80 साल बाद क्या अमेरिका यूरोप से मुंह मोड़ रहा है?

इस्राएल को दुनिया का सबसे आक्रामक देश बताने के पीछे उसकी बहुआयामी सैन्य नीतियां हैं, जिसके तहत वह एक साथ कई मोर्चों पर सीधे युद्ध में उलझा हुआ है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस्राएल इस समय न केवल गाजा, सीरिया, लेबनान और ईरान में भीषण और विनाशकारी सैन्य अभियानों को अंजाम दे रहा है, बल्कि वह यमन के हूथी विद्रोहियों के खिलाफ भी लगातार हमले कर रहा है, जिससे इस क्षेत्र में शांति बहाली की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है.

मध्य पूर्व शांति समझौता अंतिम चरण में: डॉनल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि मध्य पूर्व में शांति समझौते को लेकर जारी कूटनीतिक बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि अगले दो या तीन दिनों के भीतर एक बेहद शानदार समझौता हो सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति का यह दावा ऐसे समय में आया है जब महज एक दिन पहले ही ईरान और इस्राएल ने महीनों के सबसे भीषण हमलों के जरिए पुराने युद्धविराम को तोड़ दिया था.

ईरान से परमाणु हथियार ना बनाने की गारंटी मिली: ट्रंप

डॉनल्ड ट्रंप ने मीडिया से कहा कि ईरान और इस्राएल एक-दूसरे पर लगातार जवाबी हमले कर रहे थे, लेकिन अब वे दोनों मेरे प्रयासों के जरिए युद्ध रोकने पर सहमत हो गए हैं. ट्रंप ने आगे कहा कि इस ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होते ही वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोल दिया जाएगा. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ऐसा दावा किया हो, वे अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद से ही लगातार ईरान के साथ समझौता करीब होने की बात कह रहे हैं.

पाकिस्तान की दुविधा: अब्राहम अकॉर्ड्स से जुड़े या दूर रहे?

अमेरिकी राष्ट्रपति भले ही समझौते को बेहद नजदीक बता रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों देशों की शर्तें इस कूटनीति को बेहद पेचीदा बना रही हैं. तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी शांति समझौते को लेबनान में युद्धविराम से जोड़ रखा है, जहां इस्राएल इस समय ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के खिलाफ जंग लड़ रहा है. ईरान ने सोमवार को ही चेतावनी दी थी कि अगर इस्राएल ने लेबनान में अपने सैन्य हमले जारी रखे, तो वह इस्राएल पर दोबारा भीषण मिसाइल हमले करने से पीछे नहीं हटेगा.

हेरात में महिलाओं की गिरफ्तारी पर यूएन ने जताई चिंता

अफगानिस्तान में यूएन मिशन (यूएनएएमए) ने हेरात प्रांत में महिलाओं की गिरफ्तारी और हिरासत पर चिंता जताई है. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, ड्रेस कोड का पालन नहीं करने के आरोप में कम से कम 21 महिलाओं और लड़कियों को हिरासत में लिया गया. यूएनएएमए ने कहा कि यह कार्रवाई मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है और सभी लोगों को कानून के सामने बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए.

अफगानिस्तान में संकटों के बीच महिलाओं पर बढ़ती हिंसा

रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान ने हाल ही में महिलाओं के लिए "उचित हिजाब" पहनना अनिवार्य करने वाला निर्देश जारी किया था. इसमें कहा गया कि चेहरा खुला रखने या मेकअप करने पर महिलाओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, रॉयटर्स इस निर्देश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका. तालिबान ने इस मुद्दे पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया.

अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हमलों के बाद फिर तनाव बढ़ा

2021 में सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर कई पाबंदियां लगाई हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है. यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि अगर ये प्रतिबंध जारी रहे तो 2030 तक अफगानिस्तान में 25 हजार से अधिक महिला शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी कम हो सकते हैं. वहीं, तालिबान का कहना है कि वह इस्लामी कानून की अपनी व्याख्या के अनुसार महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करता है.

फिलीपींस में भूकंप से तबाही, मौत का आंकड़ा 37 पहुंचा

फिलीपींस के दक्षिणी शहर जनरल सैंटोस में आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है. मंगलवार को बचावकर्मी एक ढही हुई व्यावसायिक इमारत के मलबे में फंसे दो लोगों की तलाश में जुटे रहे. अधिकारियों के मुताबिक अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं. बचाव दल ने इमारत से दो लोगों को जिंदा निकाला, लेकिन एक व्यक्ति का शव भी बरामद किया गया.

क्षेत्रीय अग्निशमन अधिकारी एडगर तनावान ने बताया कि स्कैनर से अब तक मलबे में फंसे बाकी लोगों के जीवित होने के संकेत नहीं मिले हैं. 65 वर्षीय डियोसलिंडा डेलुवियो अपने बेटे के मलबे में फंसे होने से बेहद परेशान दिखीं. उन्होंने कहा कि वह केवल चाहती हैं कि उनके बेटे को जल्द बाहर निकाल लिया जाए ताकि परिवार को शांति मिल सके.

क्या है सुनामी लहरों के पीछे का विज्ञान?

भूकंप का केंद्र सारंगानी प्रांत के तट से करीब 20 किलोमीटर दूर समुद्र में था और इसके झटके पूरे मिंडानाओ क्षेत्र तथा इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप तक महसूस किए गए. कई इलाकों में इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई तथा स्कूल और अस्पतालों को भी नुकसान पहुंचा. लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स के कारण हजारों लोग राहत शिविरों और अस्थायी टेंटों में रात बिताने को मजबूर हैं.

शी जिनपिंग और किम जोंग उन ने संबंधों को मजबूत करने पर जताई सहमति

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन ने प्योंगयांग में आयोजित एक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताई है. शी जिनपिंग सोमवार को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर उत्तर कोरिया पहुंचे, जो साल 2019 के बाद से उनका यहां का पहला दौरा है.

शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया के साथ व्यापार, कृषि, बुनियादी ढांचा निर्माण और टेक्नोलॉजी जैसे व्यापक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई. चीनी राष्ट्रपति ने रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने और दोनों देशों की संप्रभुता व सुरक्षा हितों की दृढ़ता से रक्षा करने की बात कही. उन्होंने किम जोंग उन से गर्मजोशी से मुलाकात करते हुए कहा कि वे इस दौरे से बेहद खुश हैं और एक विशेष अपनेपन का अहसास कर रहे हैं.

दूसरी तरफ, किम जोंग उन ने चीनी राष्ट्रपति के इस दौरे को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह साफ तौर पर दिखाता है कि उत्तर कोरिया और चीन के आपसी संबंध कितने अटूट हैं. किम ने दोनों देशों के बीच दोस्ती के एक नए युग को आगे बढ़ाना उत्तर कोरिया का "अपरिवर्तनीय रणनीतिक विकल्प" करार दिया. उन्होंने बीजिंग के वैश्विक और क्षेत्रीय हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का भरोसा दिया.

जर्मनी और फ्रांस ने रद्द किया साझा फाइटर जेट कार्यक्रम

फ्रांस और जर्मनी का साझा फाइटर जेट बनाने का प्रोजेक्ट पूरी तरह से बंद हो गया है. बर्लिन और पेरिस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स और फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने पिछले हफ्ते इस बात पर सहमति जताई कि विमान निर्माता कंपनियां 'दसॉ' और 'एयरबस' अपने आपसी विवादों को सुलझाने में नाकाम रही हैं. इसके बाद दोनों देशों ने इस संयुक्त कार्यक्रम को समाप्त करने का फैसला ले लिया.

'फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम' (एफसीएएस) नाम का यह रक्षा कार्यक्रम साल 2017 में शुरू किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य साल 2040 तक मौजूदा 'यूरोफाइटर' और 'राफेल' लड़ाकू विमानों की जगह लेने के लिए अगली पीढ़ी का अत्याधुनिक फाइटर जेट तैयार करना था. 100 अरब यूरो से अधिक के इस मेगा प्रोजेक्ट के रद्द होने की मुख्य वजह फ्रांस की हथियार निर्माता कंपनी 'दसॉ एविएशन' और यूरोपीय कंसोर्टियम 'एयरबस डिफेंस एंड स्पेस' के बीच वर्चस्व की लड़ाई बनी.

दसॉ इस पूरे प्रोजेक्ट पर एयरबस की तुलना में बहुत अधिक नियंत्रण चाहती थी. दोनों कंपनियां प्रोजेक्ट के अगले चरण के संचालन, इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी के अधिकारों और विमान की अलग-अलग तकनीकी आवश्यकताओं को लेकर लंबे समय से आमने-सामने थीं, जिसे सुलझाया नहीं जा सका. इस फैसले पर फिलहाल एयरबस और दसॉ एविएशन दोनों ही कंपनियों ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.

शेयर बाजार में उतरेगी ओपनएआई, आईपीओ के लिए दाखिल किए दस्तावेज

चैटजीपीटी की पेरेंट कंपनी ओपनएआई ने शेयर बाजार में कदम रखने की तैयारी शुरू कर दी है. कंपनी ने सोमवार को आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि उसने अमेरिकी शेयर बाजार नियामक 'सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन' के पास अपने आईपीओ के लिए शुरुआती दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं.

कितनी 'बिजली-पानी' चूसते हैं चैटजीपीटी जैसे एआई

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ओपनएआई इस आईपीओ के जरिए 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 867 अरब यूरो) के वैल्यूएशन को छूने का लक्ष्य लेकर चल रही है. कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी का यह मेगा आईपीओ इसी साल सितंबर की शुरुआत में आ सकता है.

मौजूदा समय में एंथ्रोपिक और स्पेसएक्स जैसी दिग्गज कंपनियों की तरह ही ओपनएआई भी भारी वित्तीय घाटे का सामना कर रही है. इसका मुख्य कारण एडवांस एआई मॉडल्स को विकसित करने और विशालकाय सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने में आने वाली बेहद ऊंची लागत है. ऐसे में निवेशकों से सीधे तौर पर बड़ा फंड जुटाने और कंपनी के विस्तार के लिए आईपीओ को सबसे तेज और कारगर जरिया माना जा रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 10, 2026 11:20 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).