विदेश की खबरें | केंद्रीय मंत्री मुरुगन श्रीलंका की चार दिवसीय यात्रा पर जाफना पहुंचे, कानकेसनतुरई बंदरगाह भी गए

कोलंबो, नौ फरवरी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन बृहस्पतिवार को श्रीलंका की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर जाफना पहुंचने के बाद देश के उत्तरी हिस्से में स्थित कानकेसनतुरई बंदरगाह भी गए।

यह बंदरगाह भारत-श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय साझेदारी के दो प्रमुख स्तंभों संपर्क और बुनियादी ढांचे से जुड़ा हुआ है।

भारतीय उच्चायोग ने बताया कि मुरुगन ने गवर्नर जीवन थियागराज से मुलाकात की और भारत द्वारा जाफना तथा क्षेत्र को विकास साझेदारी में दिए जाने वाले महत्व के रेखांकित किया।

उच्चायोग ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ‘‘संपर्क और बुनियादी ढांचे का विकास श्रीलंका-भारत साझेदारी के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। केन्द्रीय मंत्री मुरुगन का केकेस (कानकेसनतुरई) बंदरगाह जाना इन क्षेत्रों को भारत द्वारा महत्व दिए जाने का संकेत है।’’

गौरतलब है कि कानकेसनतुरई गोदी को व्यावसायिक बंदरगाह के रूप में विकसित करने के लिए 2018 में भारत ने श्रीलंका को 4.527 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता दी थी।

अपनी यात्रा के दौरान इस दौरान केन्द्रीय मंत्री मुरुगन भारत सरकार के अनुदान से निर्मित जाफना सांस्कृतिक केंद्र को श्रीलंका के लोगों को समर्पित करेंगे। इस केंद्र का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2015 में किया था।

भारतीय उच्चायोग के अनुसार, जाफना पहुंचने पर केन्द्रीय मंत्री का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। उन्होंने जाफना सार्वजनिक पुस्तकालय के भारतीय खंड में डॉक्टर ए. पी.जे. अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि भी दी।

बयान के अनुसार, केन्द्रीय मंत्री ने इस पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘पड़ोसी प्रथम’ की नीति के तहत भारत भविष्य में भी सहयोग करना जारी रखेगा।

उच्चायोग ने ट्वीट किया, ‘‘श्रीलंका के लोगों के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं का प्रदर्शन। केन्द्रीय मंत्री मुरुगन ने जाफना में 250 जरूरतमंद परिवारों को सूखा राशन दिया।’’

सरकारी बयान के अनुसार, केन्द्रीय मंत्री नौ से 12 फरवरी तक इस यात्रा के दौरान ऐसे विभिन्न स्थलों का दौरा करेंगे जो श्रीलंका में भारत सरकार की जन-केंद्रित विकास साझेदारी के पैमाने और सीमा को रेखांकित करते हैं। इसके साथ ही वह विभिन्न समूहों/समुदायों के नेताओं और हितधारकों से बातचीत भी करेंगे।

जाफना सांस्कृतिक केंद्र भारत-श्रीलंका विकास साझेदारी का एक शानदार उदाहरण है। यह मुख्य रूप से उत्तरी प्रांत के लोगों के लिए सांस्कृतिक बुनियादी ढांचे का विस्तार करने के उद्देश्य से एक सुलह परियोजना के रूप में शुरू किया गया था।

बयान में कहा गया कि इस अत्याधुनिक केंद्र में कई सुविधाएं शामिल हैं जैसे संग्रहालय, 600 से अधिक लोगों के लिए एक उन्नत थिएटर शैली का सभागार, ग्यारह मंजिला एक शिक्षण टॉवर, एक सार्वजनिक चौक जिसका उपयोग रंगमंच के रूप में भी किया जा सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि मुरुगन यात्रा के चौथे दिन, 12 फरवरी को भारत वापसी से पहले राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे से मिलेंगे।

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