देश की खबरें | केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार को दरकिनार पर तीन आईपीएस अधिकारियों को केंद्र में बुलाया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 12 दिसंबर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमले के दो दिन बाद गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में कार्यरत भारतीय पुलिस सेवा के तीन अधिकारियों को सेवा में कथित कोताही के चलते केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए एकतरफरा तरीके से समन जारी किया। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

तीनों आईपीएस अधिकारियों - भोलानाथ पांडे (पुलिस अधीक्षक डायमंड हार्बर), प्रवीण त्रिपाठी (पुलिस उप महानिरीक्षक प्रेसिडेंसी रेंज) और राजीव मिश्रा (अतिरिक्त महानिदेशक, दक्षिण बंगाल)- को नौ और 10 दिसंबर को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की राजनीतिक रूप से संवेदनशील पश्चिम बंगाल की यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

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माना जा रहा है कि गृह मंत्रालय के इस कदम से पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ ममता बनर्जी नीत सरकार और केंद्र की भाजपा नीत सरकार के बीच दो दिन पहले नड्डा के काफिले पर हुए हमले के कारण पैदा हुई खींचतान और बढ़ेगी।

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि तीनों आईपीएस अधिकारी पश्चिम बंगाल कैडर के हैं और उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में सेवा के लिये बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि इन अधिकारियों को उन कथित खामियों की वजह से बुलाया गया है, जिनकी वजह से नड्डा के काफिले पर हमला हुआ।

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उन्होंने बताया कि यह फैसला अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों पर लागू होने वाली नियमावली के तहत लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि सामान्य तौर पर अखिल भारतीय सेवा के किसी अधिकारी को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुलाने से पहले संबंधित राज्य की सहमति ली जाती है, लेकिन इस मामले में गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को दरकिनार कर एकतरफा तरीके से फैसला लिया है।

माना जाता है कि तीनों अधिकारी पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार के करीबी हैं।

बता दें कि गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख को समन जारी कर 14 दिसंबर को पेश होकर राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति के बारे में बताने को कहा था।

हालांकि, राज्य सरकार ने समन को मानने से इनकार कर दिया है।

राज्य के मुख्य सचिव ने केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें 14 दिसंबर को राज्य के अधिकारियों की मौजूदगी के बिना बैठक करने का अनुरोध करने का निर्देश दिया गया है। इस पत्र के जरिए उन्होंने परोक्ष तौर पर संकेत दिया कि वह महज राज्य सरकार के आदेश का पालन कर रहे हैं।

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