देश की खबरें | केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेबी और लक्जमबर्ग के सीएसएसएफ के बीच द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, नौ दिसंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और लक्जमबर्ग के फाइनेंसियल एंड कमीशन डे सर्विलांस डू सेक्टयूर फाइनेंसर (सीएसएसएफ) के बीच द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दे दी।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक इस समझौता ज्ञापन से प्रतिभूति नियमों के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को मजबूत करने और आपसी सहायता की सुविधा देने, तकनीकी ज्ञान के उपयोग संबंधी पर्यवेक्षी कार्यों के कुशल प्रदर्शन के लिए योगदान करने तथा भारत और लक्जमबर्ग के प्रतिभूति बाजारों को नियंत्रित करने वाले नियम व कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन को सक्षम बनाने की संभावना है।

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सीएसएसएफ, सेबी के समान अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभूति आयोग संगठन के बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन का सह-हस्ताक्षरकर्ता है। हालांकि, इसके दायरे में तकनीकी सहयोग के प्रावधान नहीं हैं।

बयान में कहा गया कि यह द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन प्रतिभूति कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन के लिए सूचना साझा करने के ढांचे को मजबूत करने में योगदान देगा तथा तकनीकी सहायता कार्यक्रम को स्थापित करने में भी सहायता प्रदान करेगा।

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तकनीकी सहायता कार्यक्रम, पूंजी बाजार, कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण गतिविधियाँ और प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित मामलों में परामर्श के माध्यम से प्राधिकरणों को लाभान्वित करेगा।

ज्ञात हो कि भारत में प्रतिभूति बाजार को विनियमित करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के तहत सेबी की स्थापना की गई थी। सेबी का उद्देश्य निवेशकों के हितों की रक्षा करना तथा भारत में प्रतिभूति बाजारों के विकास को बढ़ावा देना व इन्हें विनियमित करना है।

लक्जमबर्ग का सीएसएसएफ एक सार्वजनिक कानून इकाई है, जिसके पास प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता है और इसकी स्थापना कानून के तहत 23 दिसंबर 1998 को हुई थी।

सीएसएसएफ लक्जमबर्ग के संपूर्ण वित्तीय केंद्र (बीमा क्षेत्र को छोड़कर) की विवेकपूर्ण देखरेख के लिए सक्षम प्राधिकरण है। वह प्रतिभूति बाजार के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए भी कानूनी रूप से उत्तरदायी है।

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