विदेश की खबरें | संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरियाई लोगों की जबरन स्वदेश वापसी को लेकर चिंता जताई
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

इस मुद्दे पर चुप्पी साधने को लेकर मानवाधिकार समूहों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की आलोचना की थी।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टुर्क और उनके कार्यालय पर निशाना साधते हुए विभिन्न मानवाधिकार समूहों ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के लिए यह आग्रह करने के वास्ते‘‘अभी भी देर नहीं हुई है’’ कि चीन को उत्तर कोरियाई लोगों की जबरन स्वदेश वापसी को रोकना चाहिए।

मानवाधिकार समूहों ने चेतावनी दी कि यदि उत्तर कोरिया कोविड-19 से जुड़े यात्रा प्रतिबंधों में ढील देता है, तो उत्तर कोरिया से भागे लोगों को चीन द्वारा वापस भेजे जाने की दर बढ़ सकती है।

इन समूहों ने कहा कि इससे ‘‘चीन में कथित तौर पर अवैध प्रवासियों के रूप में हिरासत में लिए गए लगभग 2,000 उत्तर कोरियाई लोगों की जबरन वापसी फिर से शुरू हो सकती है।’’

शुक्रवार देर रात ‘एसोसिएटेड प्रेस’ द्वारा इस संबंध में पूछे जाने पर प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय चीन और अन्य जगहों से उत्तर कोरियाई लोगों की जबरन वापसी के बारे में बहुत चिंतित है।

लॉरेंस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों को बनाए रखने के लिए कार्यालय ने कई मौकों पर ‘‘इन चिंताओं को सार्वजनिक रूप से उठाया’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के लिए प्राथमिकता बना हुआ है।’’

जिनेवा में चीनी राजनयिक मिशन से इस संबंध में तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।

एपी

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