अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने कहा कि करीब 50 प्रतिशत उल्लंघन ‘‘प्रताड़ना और अन्य क्रूर, अमानवीय तथा अपमानजनक बर्ताव’’ से जुड़े हैं।
मिशन की मानवाधिकार सेवा की रिपोर्ट में अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से 29 में जनवरी 2022 से जुलाई 2023 के तक मामले दर्ज किए गए हैं। उसने बताया कि 11 फीसदी मामले महिलाओं से संबंधित हैं।
उसने कहा कि कबूलनामे और अन्य सूचना निकलवाने से जुड़े उत्पीड़न में पिटाई, दम घुटना, छत से लटकाना और बिजली के झटके देना शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त ने रिपोर्ट के साथ एक बयान जारी कर कहा, ‘‘पिटाई, बिजली के झटके और क्रूरता के अन्य तरीके तथा अपमानजनक बर्ताव के साथ लोगों तथा उनके परिवार को धमकियां दिए जाने की दास्तान खौफनाक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह रिपोर्ट बताती है कि प्रभावी जांच की आड़ में अत्याचार को एक हथकंडे के रूप में इस्तेमाल किया गया। मैं सभी संबंधित प्राधिकारियों से इन अत्याचारों को रोकने तथा दोषियों को जवाबदेह ठहराने के लिए ठोस उपाय करने का अनुरोध करता हूं।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्याचार और अन्य अपमानजनक बर्ताव के मामलों में शारीरिक यातना के 259 मामले और मानसिक यातना के 207 मामले शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र मिशन ने कहा कि उसका मानना है कि हिरासत में अत्याचार की घटनाएं बेहद कम दर्ज की गयी हैं और आकंड़ें इससे कहीं अधिक हो सकते हैं।
रिपोर्ट में दर्ज एक प्रतिक्रिया में तालिबान नीत विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकारी एजेंसियों ने हिरासत में चल रहे लोगों के मानवाधिकार की स्थिति में सुधार के लिए कदम उठाए हैं और इस्लामिक कानून में अत्याचार निषिद्ध है।
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