रूस के बेल्गोरोद इलाके के गवर्नर वायचेस्लेव ग्लादकोव ने आरोप लगाया है कि रूसी क्षेत्र में दो हेलीकॉप्टरों ने हवाई हमले किये, जिससे कई जगहों पर आग लग गई और दो लोग घायल हो गये।
क्रेमलिन (रूसी सरकार के मुख्यालय) के प्रवक्ता ने कहा कि रूस के क्षेत्र में यह कार्रवाई रूस और यूक्रेन के बीच वीडियो कांफ्रेंस के जरिये शुक्रवार को बहाल हुई वार्ता की सफलता पर ग्रहण लगा सकती है।
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर यह ऐसा नहीं है जो वार्ता को जारी रखने के लिए सहज माहौल बनाता हो।’’ उन्होंने यह टिप्पणी हमले से यूक्रेन में युद्ध तेज होने की आशंका को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में की।
उल्लेखनीय है कि रूस द्वारा पांच सप्ताह पहले शुरू की गई सैन्य कार्रवाई में हजारों लोगों की मौत हुई है और करीब 40 लाख लोगों ने यूक्रेन से निकलकर पड़ोसी देशों में शरण ली है।
हालांकि, अबतक इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है कि यूक्रेन के हेलीकॉप्टर ने बेल्गोरोद में तेल डिपो और कई प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
यूक्रेन के विदेशमंत्री दिमित्रों कुलेबा ने कहा कि वह ‘‘न तो पुष्टि कर सकते हैं और न ही खारिज कर सकते हैं कि यूक्रेन इस हमले में शामिल है या नहीं क्योंकि उनके पास सभी सैन्य सूचना नहीं आती है।
रूस ने बताया कि पहले भी यूक्रेन की ओर से गोलाबारी की गई है लेकिन उसके हवाई क्षेत्र में घुसपैठ नहीं की गई।
रूस ने जिस तेल डिपो को निशाना बनाए जाने का दावा किया है उसका संचालन रूसी कंपनी रोसनेफ्ट करती है और यह यूक्रेन की सीमा से करीब 35 किलोमीटर दूर है।
इस बीच, रूसी सेना यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास के इलाकों से पीछे हट रही है। तीन दिन पहले रूस ने कहा था कि वह यूक्रेन की राजधानी और उत्तरी शहर चर्नीहीव में अपनी सैन्य गतिविधियों को कम करेगा ताकि वार्ता के लिए दोनों पक्षों में विश्वास बढ़ाया जा सके।
वहीं, यूक्रेन और उसके सहयोगियों ने चेतावनी दी है कि रूस सैनिकों को वापस नहीं बुला रहा है बल्कि उनकी तैनाती यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र डोनबास में कर रहा है, जहां पर रूसी भाषियों का प्रभुत्व है।
इस बीच,वार्ता में रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे व्लादिमीर मेदिंस्की ने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्रीमिया प्रायद्वीप पर नियंत्रण कायम रखने और अपने क्षेत्र का विस्तार पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थित अलगाववादी इलाकों तक करने के रुख में ‘बदलाव नहीं’’आया है।
रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति (आईसीआरसी) ने कहा कि मारियोपोल तक आपात सहायता पहुंचाने और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की मुश्किल रणनीति पर अब भी काम किया जा रहा है, जहां पर हफ्तों से लोग गोलाबारी की वजह से फंसे हुए हैं तथा पानी, खाद्य सामग्री और दवाओं की कमी है।
आईसीआरसी के प्रवक्ता इवान वॉटसन ने शुक्रवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र को स्थिति की जानकारी देते हुए बताया, ‘‘ मारियोपोल के लोग जिस भयावह दौर से गुजर रहे हैं उसे बताने के लिए हमारे पास शब्द नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘स्थिति भयावह है, और खराब हो रही है। अब मानवीय सहायता अनिवार्य है ताकि लोग वहां से बाहर निकल सके और उन्हें सहायता पहुंचाई जा सके।’’
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