नयी दिल्ली/लंदन, 17 अप्रैल ब्रिटेन के प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) एडमिरल सर टोनी रेडाकिन ने सोमवार को कहा कि भारत और ब्रिटेन एक ऐसी दुनिया में ‘‘स्वाभाविक भागीदार’’ हैं जो अधिक ‘‘प्रतिस्पर्धी और अस्थिर’’ होती जा रही है।
दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों में प्रगति के साथ एडमिरल रेडाकिन भारत के तीन दिवसीय दौरे में उच्च स्तरीय बैठकों में भाग ले रहे हैं। रेडाकिन ने अपने भारतीय समकक्ष जनरल अनिल चौहान के साथ पहली मुलाकात से पहले सोमवार सुबह राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देकर भारत की अपनी यात्रा शुरू की।
इस बीच, ब्रिटेन के रक्षा मंत्री बेन वालेस ने भारत को एक ‘‘मूल्यवान रक्षा भागीदार’’ बताया और कहा कि दोनों देश रणनीतिक हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध हैं।
नयी दिल्ली में रेडाकिन की बैठकों से पहले, ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वालेस ने कहा, ‘‘ब्रिटेन के लिए भारत एक महत्वपूर्ण रक्षा भागीदार है और हमारे संबंध हमारे अनुसंधान और औद्योगिक क्षेत्रों में फल-फूल रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम इस क्षेत्र में सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपने भारतीय भागीदारों के साथ प्रशिक्षण और संचालन जारी रखेंगे।’’
ब्रिटेन सरकार के एक बयान में कहा गया कि दोनों सीडीएस ने ब्रिटेन-भारत रक्षा साझेदारी के विभिन्न आयामों पर प्रगति की समीक्षा की और सभी क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए विचारों का आदान-प्रदान किया।
बयान में कहा गया है कि ब्रिटेन और भारत रक्षा क्षेत्र में स्वाभाविक भागीदार हैं और अनुसंधान, विकास और प्रशिक्षण में सहयोग सहित एक मजबूत और स्थायी संबंध साझा करते हैं।
बयान में एडमिरल रेडाकिन के हवाले से कहा गया, ‘‘एक वैश्विक व्यापारिक राष्ट्र के रूप में ब्रिटेन के लिए यह मायने रखता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र खुला और मुक्त हो, यही कारण है कि ब्रिटिश सशस्त्र बल किसी भी यूरोपीय राष्ट्र के क्षेत्र में सबसे व्यापक और सबसे एकीकृत उपस्थिति स्थापित कर रहे हैं।’’
एडमिरल रेडाकिन ने कहा कि भारत और ब्रिटेन रक्षा क्षेत्र में और अधिक सहयोग कर सकते हैं। एडमिरल रेडाकिन ने नौसेना प्रमुख एडमिरल हरि कुमार, थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे, रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने और अतिरिक्त सचिव रक्षा उत्पादन टी नटराजन के साथ विचार-विमर्श किया।
अगले दो दिन एडमिरल रेडाकिन भारतीय सशस्त्र बलों के विभिन्न प्रतिष्ठानों की यात्रा करेंगे ताकि परस्पर सैन्य जुड़ाव को बढ़ावा दिया जा सके और भविष्य की प्रौद्योगिकियों के सह-निर्माण के अवसरों का पता लगाया जा सके।
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