देश की खबरें | दो न्यायाधीशों ने नियुक्ति से संबंधित कॉलेजियम नोट पर आपत्ति जताई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीशों के कॉलेजियम के दो सदस्यों ने शीर्ष अदालत में चार न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्ताव पर लिखित सहमति देने को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीशों के कॉलेजियम के दो सदस्यों ने शीर्ष अदालत में चार न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्ताव पर लिखित सहमति देने को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने हाल में बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की और शीर्ष अदालत में शेष चार रिक्तियों के लिए कुछ अन्य नामों पर कॉलेजियम में कथित तौर पर विचार-विमर्श हुआ था।
सीजेआई के अलावा, चार वरिष्ठ न्यायाधीश - न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एस के कौल, एस ए नज़ीर और के एम जोसेफ - पांच सदस्यीय कॉलेजियम का हिस्सा हैं, जो शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों के नामों का चयन करता है और केंद्र को अनुशंसा करता है।
सूत्रों के अनुसार, कॉलेजियम की बैठक दशहरे की छुट्टी से पहले अंतिम कार्य दिवस 30 सितंबर को नहीं हो सकी, क्योंकि कॉलेजियम के एक सदस्य उपलब्ध नहीं थे। शीर्ष अदालत 10 अक्टूबर को फिर से खुलने वाली है।
बाद में, कथित तौर पर एक प्रस्ताव भेजा गया जिसमें उच्च न्यायालय के तीन मुख्य न्यायाधीशों और एक वरिष्ठ अधिवक्ता को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने के लिए कॉलेजियम के सदस्य न्यायाधीशों की लिखित मंजूरी मांगी गई थी।
परंपरा के अनुसार, कॉलेजियम के सदस्य उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदोन्नति के संभावित नामों पर चर्चा करने के बाद प्रस्तावों पर हस्ताक्षर करते हैं।
सूत्रों ने कहा कि कॉलेजियम के दो सदस्यों को प्रत्यक्ष चर्चा करने की परंपरा को तोड़कर प्रस्ताव भेजने और लिखित में सहमति उपलब्ध कराने को लेकर कुछ आपत्ति है।
वरिष्ठ अधिवक्ता के वी विश्वनाथन के अलावा, न्यायमूर्ति रविशंकर झा, संजय करोल और पीवी संजय कुमार, क्रमश: पंजाब और हरियाणा, पटना और मणिपुर उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के नाम कथित तौर पर कॉलेजियम सदस्य को उनकी सहमति के लिए भेजे गए हैं।
इससे पहले, सीजेआई की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 30 सितंबर को क्रमश: उड़ीसा, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के रूप में पदोन्नति के लिए उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों-न्यायमूर्ति जसवंत सिंह, न्यायमूर्ति पीबी वराले और अली मोहम्मद माग्रे के नामों की सिफारिश करते हुए बयान जारी किए थे।
इसने केंद्र को उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस मुरलीधर, और जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज मिथल को क्रमशः मद्रास और राजस्थान उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित करने की भी सिफारिश की।
इसने उच्च न्यायालयों के तीन न्यायाधीशों के स्थानांतरण की भी सिफारिश की थी।
इससे पहले, शीर्ष अदालत के कॉलेजियम ने बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दत्ता को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी।
बारह सितंबर को न्यायमूर्ति ललित के नेतृत्व वाले कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा, बंबई और कर्नाटक के उच्च न्यायालयों में 20 न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी।
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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 05, 2022 09:14 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

