देश की खबरें | तृणमूल ने एक सप्ताह के भीतर मणिपुर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की मांग की

नयी दिल्ली, 24 जून मणिपुर की स्थिति से निपटने को लेकर केंद्र पर सवाल खड़ा करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को इस हिंसा प्रभावित राज्य में एक सप्ताह भीतर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की मांग की। उसने प्रश्न किया कि क्या सरकार ‘‘मणिपुर को कश्मीर बनाने की कोशिश कर रही है’’।

तृणमूल की ओर से जारी बयान के अनुसार, मणिपुर की स्थिति पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में पार्टी के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने केंद्र पर मणिपुर के लोगों की जरूरतों की ‘अनदेखी’ करने का आरोप लगाया।

इस बैठक में भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामदलों और अन्य दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया।

सर्वदलीय बैठक के बाद मणिपुर के लिये भाजपा के प्रभारी संबित पात्रा ने संवाददाताओं को बताया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर मणिपुर में शांति बहाली के लिए सभी प्रयास किये जा रहे हैं।

पात्रा के अनुसार, गृहमंत्री ने बैठक में यह भी कहा कि जब से राज्य में हिंसा शुरू हुई है, तब से ‘एक भी दिन ऐसा नहीं हुआ है’, जब उन्होंने स्थिति पर प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत नहीं की हो या प्रधानमंत्री ने निर्देश न दिये हों।

एक बयान में तृणमूल कांग्रेस ने हिंसा से संबंधित घटनाक्रम को पेश किया और बताया कि गोली लगने के बाद अस्पताल जा रहे सात वर्ष के एक बच्चे, उसकी मां एवं उसकी चाची को कथित रूप से जला दिया गया।

तृणमूल कांग्रेस ने कहा, ‘‘ यह तो बस एक ही कहानी है। दिल को दहला देने वाली ऐसी हजारों कहानियां हैं। मणिपुर में बहुत विकट स्थिति है तथा केंद्र सरकार बुरी तरह विफल हुई है।’’

पार्टी ने बयान में कहा, ‘‘जब मणिपुर जल रहा है, तब असम प्रभावित हुआ, मेघालय प्रभावित हुआ, पूरा पूर्वोत्तर प्रभावित हुआ। पूरा देश प्रभावित हुआ। क्या केंद्र सरकार मणिपुर को कश्मीर बनाने की कोशिश कर रही है?’’

इस बयान में डेरेक ओ ब्रायन की टिप्पणियां भी शामिल हैं।

पार्टी ने कहा कि राज्य में निराशा, भय और हताशा की भावना व्याप्त है, लोगों की जान जा रही है, छात्र परीक्षा नहीं दे पा रहे हैं, मरीज प्रभावित हैं और लोग भय में जी रहे हैं।

उसने कहा कि 4000 से अधिक घरों पर हमला किया गया और उन्हें नष्ट कर दिया गया, 60000 लोग विस्थापित हुए हैं, 50 दिनों से राज्य में इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं, जो उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लंघन है।

पार्टी ने आरोप लगाया, ‘‘ राज्य में संवैधानिक मशीनरी पूरी तरह ठप हो गयी है।’’

तृणमूल ने यह भी कहा कि गृह मंत्री अमित शाह की मणिपुर यात्रा में भी काफी विलंब हुआ, क्योंकि यह हिंसा शुरू होने के चार सप्ताह बाद हुई। पार्टी ने कहा कि शाह केवल ‘शिविरों में गये और उन्होंने कुछ चुनिंदा लोगों से भेंट की।’’

तृणमूल ने कहा, ‘‘ उन्होंने सड़कों पर उन लोगों से भेंट नहीं की, जो प्रभावित हुए हैं , जो सदमे में जी रहे हैं। गृह मंत्री की तीन दिवसीय यात्रा से स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। वास्तव में, उसके बाद स्थिति और बिगड़ी।’’

पार्टी ने कहा कि उसकी नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मणिपुर जाने की अनुमति मांगी, लेकिन गृहमंत्री की ओर उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।

पार्टी ने कहा कि उसने मणिपुर संकट पर चर्चा करने के लिए गृह विभाग की ससंदीय समिति की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की, लेकिन समिति के अध्यक्ष ने जवाब दिया कि ‘जो विषय उठाया गया है, उसपर चर्चा करना कठिन है।’’

बयान में कहा गया है, ‘‘मणिपुर के लोगों का विश्वास बढ़ाने तथा उनके जख्मों पर मरहम लगाने के लिए तृणमूल कांग्रेस मांग करती है कि एक सप्ताह में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल मणिपुर भेजा जाए। केंद्र की ओर से अबतक का रुख उपेक्षा भरा रहा है उसे बदलकर मरहम लगाने, उनका खयाल रखने, शांति एवं सद्भाव कायम करने वाला होना चाहिए।’’

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