देश की खबरें | महाकौशल में कांटे की टक्कर, मुकाबला 'कमल' के 'महा' समीकरण और ‘नाथ’ के 'कौशल' में

(ब्रजेन्द्र नाथ सिंह)

जबलपुर, 14 नवंबर पिछले विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की सत्ता की कुंजी माने जाने वाले महाकौशल क्षेत्र में कांग्रेस ने यहां की 38 में से 24 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी लेकिन इस बार उसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से कड़ी चुनौती मिल रही है।

मतदाताओं का एक वर्ग जहां ‘बदलाव’ की बात करता है, वहीं कमोबेश यही प्रतिशत उन लोगों का है जो ‘मोदी और मामा’ के कार्यों की सराहना करते नहीं थकता।

मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों के लिए 17 नवंबर को मतदान होना है। नतीजे तीन दिसंबर को आएंगे। लिहाजा, ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो उसके बाद ही पता चलेगा।

भाजपा की रणनीति पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के प्रभाव वाले इस इलाके में अपने ‘महा समीकरण’ के जरिए उनके कौशल को घेरने की है तो कांग्रेस भी पिछले चुनाव में मिली बढ़त को बरकरार रखने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।

भाजपा के लिए यह क्षेत्र कितना महत्व रखता है कि इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने विधानसभा चुनाव में जिन तीन केंद्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को उतारा है उनमें से दो केंद्रीय मंत्री सहित चार सांसद इस क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं।

महाकौशल का ‘प्रवेश द्वार’ कहे जाने वाले जबलपुर के आशीष सोनकर ‘डबल इंजन’ सरकार की वकालत करते हैं और कांग्रेस को ‘सनातन विरोधी’ बताते हैं। वह दावा करते हैं कि प्रदेश की जनता केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हुई है, इसलिए वह फिर एक बार भाजपा की सरकार चाहती है।

पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां शानदार प्रदर्शन कर राज्य की सत्ता में वापसी की थी वहीं भाजपा 13 सीटों पर सिमट गई थी। इससे पहले 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को महाकौशल से बढ़त मिली थी। उसने 24 सीटें जीती थीं तो कांग्रेस 13 सीटों पर सिमट गई थी।

महाकौशल क्षेत्र में जबलपुर, छिंदवाड़ा, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडोरी और बालाघाट शामिल हैं। अनुसूचित जनजाति के लिए यहां की 13 सीटें आरक्षित हैं। कांग्रेस ने पिछले चुनाव में इनमें से 11 सीटें जीती थीं जबकि शेष दो सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी।

क्षेत्र में भाजपा का प्रचार अभियान भी मोदी केंद्रित है। पोस्टरों व बैनरों में ‘मामा’ के नाम से लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा मोदी की एक बड़ी तस्वीर हर विधानसभा क्षेत्र में दिखती है और जिस पर लिखा होता है ‘मध्य प्रदेश के मन में मोदी’।

क्षेत्र के लोगों के मन में महाकौशल के पिछड़ेपन की टीस भी दिखती है और उन्हें यह अफसोस भी है, कि जो जबलपुर कभी रायपुर और नागपुर से भी आगे हुआ करता था वह आज इंदौर और भोपाल से कहीं पीछे छूट गया है।

महाकौशल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संयुक्त सचिव अखिल मिश्र ने पीटीआई- से कहा, ‘‘यहां जैसा विकास, जैसी बुनियादी अवसंरचना होनी चाहिए थी वैसा कुछ भी नहीं हुआ। मध्य प्रदेश में महाकौशल को जो स्थान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। जनता जागरूक है और सब कुछ समझती है।’’

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