देश की खबरें | शीर्ष अदालत को समलैंगिक विवाह पर विधायिका को फैसला लेने देना चाहिए : अधिवक्ता संघों की समन्वय समिति

नयी दिल्ली, 24 अप्रैल दिल्ली की सभी जिला अदालत अधिवक्ता संघों की समन्वय समिति ने सोमवार को कहा कि समलैंगिक विवाह को अनुमति दिये जाने के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई जारी है, लेकिन इसका निर्णय विधायिका द्वारा किया जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत समलैंगिक जोड़ों के बीच शादी को कानूनी मंजूरी देने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

समिति ने एक प्रस्ताव में कहा है कि उच्चतम न्यायालय के समक्ष चल रही कार्यवाही के सामाजिक प्रभाव बहुत बड़े हैं और सामाजिक ताने-बाने पर अनपेक्षित प्रभाव पड़ने की संभावना है।

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि बड़े पैमाने पर समाज को प्रभावित करने की क्षमता वाले मुद्दों पर संसद में चर्चा और बहस हो, जहां निर्वाचित प्रतिनिधि अपने मतदाताओं के विचारों और चिंताओं को ध्यान में रख सकें।’’

इसने कहा कि यह मुद्दा सामाजिक मानदंडों, मूल्यों और विश्वासों में गहराई से उलझा हुआ है और समाज के दृष्टिकोण के लाभ के बिना अलग तरह से लिये गये निर्णय के अप्रभावी होने की संभावना है। समिति ने कहा कि इसका प्रतिकूल असर भी हो सकता है।

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर सावधानीपूर्वक विचार और सार्वजनिक बहस की आवश्यकता है और इस मुद्दे को न्यायिक व्याख्याओं के माध्यम से तय नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इसके लिए अधिक व्यापक परामर्श प्रक्रिया की आवश्यकता है।

प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि इस मुद्दे को संसद को भेजा जाना चाहिए, जहां अधिक व्यापक परामर्श प्रक्रिया हो सकती है।

इसमें कहा गया है, ‘‘इसमें कोई दोराय नहीं है कि विधायिका ने विवाह से संबंधित विभिन्न कानूनों का मसौदा तैयार करते समय समलैंगिकों के बीच विवाह के मुद्दे पर कभी विचार नहीं किया। इसलिए, 'विधायी मंशा' की व्याख्या करने का कोई भी न्यायिक प्रयास बेकार हो जाएगा।’’

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