देश की खबरें | कोरोना वायरस महामारी के बीच राजस्थान में बुधवार को हजारों शादियां, प्रशासन सतर्क

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान में बुधवार को शादियों का ‘अबूझ सावा’ है और राजधानी जयपुर में करीब 4,000 विवाह समारोह सहित पूरे राजस्थान में इस दिन दसियों हजार शादियां होनी हैं।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

जयपुर, 24 नवंबर राजस्थान में बुधवार को शादियों का ‘अबूझ सावा’ है और राजधानी जयपुर में करीब 4,000 विवाह समारोह सहित पूरे राजस्थान में इस दिन दसियों हजार शादियां होनी हैं।

बुधवार, 25 नवंबर को को देवउठनी एकादशी है। परंपरागत रूप से इसे ‘अबूझ सावा’ कहा जाता है यानी इस दिन शादी विवाह के लिए मुहुर्त निकलवाने की जरूरत नहीं होती। कोरोना वायरस महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के खुलने के बाद यह अपनी तरह का बड़ा अवसर है जब एक ही दिन में हजारों शादियां होंगी।

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कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के बीच इन शादियों को लेकर प्रशासनिक अधिकारी संक्रमण की रोकथाम के दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। वहीं राज्यपाल कलराज मिश्र व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोगों से ऐसे आयोजनों के दौरान सजग-सतर्क रहने की अपील की है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उपखंड अधिकारी एसडीएम कार्यालय जयपुर में 2,600, एसडीएम कार्यालय आमेर में 600 व एसडीएम कार्यालय सांगानेर में लगभग 1,400 शादियों की सूचना है। इनमें से 80 प्रतिशत शादियां बुधवार को होनी हैं। इसके बाद 27 नवंबर व 30 नवंबर को बड़ा सावा है।

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ऑल इंडिया टेंट डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि जिंदल के अनुसार राजस्थान में कल दसियों हजार शादियां होंगी। उन्होंने कहा कि केवल जयपुर शहर में आधिकारिक रूप से यह आंकड़ा 4,000 से अधिक शादियों का है। पूरे राज्य की बात की जाए तो आंकड़ा दसियों हजार होगा।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में शादियों के दो बड़े सावे होते हैं ... अप्रैल में आखा तीज यानी अक्षय तृतीया का और दूसरा देवोत्थान या देवउठनी ग्यारस का।

लॉकडाउन के चलते आखा तीज पर इस बार बड़ी संख्या में विवाह नहीं हो पाए।

उल्लेखनीय है कि दिवाली के बाद कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने के बाद सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए शादी-विवाह के लिए लोगों की संख्या को 250 से घटाकर 100 कर दिया है।

एक अधिकारी ने ‘’ से कहा, ‘‘इतनी बड़ी संख्या में हो रही शादियों में लोगों की संख्या सहित अन्य प्रोटोकॉल का पालन करवाना आसान काम नहीं है।’’

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