नयी दिल्ली, 20 सितंबर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर कोरोना वायरस संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि इस महामारी को लेकर सरकार के स्तर पर कोई तैयारी नहीं थी और सिर्फ ‘कुप्रबंधन’ देखने को मिला।
लोकसभा में नियम 193 के तहत कोविड-19 वैश्विक महामारी पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने यह भी कहा कि सरकार को कोरोना वायरस की जांच और इससे निपटने के उपायों को लेकर अधिक पारदर्शिता का परिचय देना चाहिए।
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उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ इस बीमारी के कारण सरकार के लिए एक अच्छी बात हो गई कि उसे मुंह छिपाने का बहाना मिल गया।’’
तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य ने आरोप लगाया कि देश में रोजाना सबसे ज्यादा मामले आ रहे हैं और सबसे अधिक मौतें हो रही हैं। यह चिंता का विषय है। सरकार की तरफ से ‘कुप्रबंधन’ देखने को मिला है।
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उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में निवार्चित सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। हमने देखा कि सरकार की तरफ से उठाए जाने वाले कदमों के संदर्भ में स्पष्टता और तैयारियों की कमी देखने को मिली।
थरूर ने कहा कि जनवरी में यह संकेत मिल गया था कि यह वायरस खतरनाक है। जनवरी महीने में भारत पहला मामला आया। इसके बाद राहुल गांधी ने सरकार को आगाह किया था कि कोरोना वायरस संकट खतरनाक है और सरकार को समय रहते कदम उठाने पड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी की चेतावनी को सुन लिया गया होता तो स्थिति कुछ और होती। लेकिन यह सरकार मध्य प्रदेश में सरकार गिराने में लगी थी। सरकार ने इस समस्या को नजरअंदाज किया।
कांग्रेस सांसद के अनुसार, यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह देश को विश्वास में ले, न कि लोगों को अंधेरे में रखे। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के खिलाफ 21 दिनों में लड़ाई जीती जाएगी। लेकिन पिछले छह महीने से स्थिति खराब होती है।
उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘ हम यह नहीं कहते थे कि महामारी नहीं थी, हम यह बता रहे हैं कि तैयारी नहीं थी।’’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि कोरोना संकट के खिलाफ सरकार के प्रयास गुमराह करने वाले थे और वे विफल रहे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि बिना तैयारी के लॉकडाउन लगाकर कारोबारी गतिविधियों को रोक दिया गया। अर्थव्यवस्था पहले से खराब स्थिति में थी जो और खराब हो गई। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी 24 फीसदी गिर गई।
उन्होंने दावा किया कि 2.1 करोड़ वेतनभोगी लोगों ने अप्रैल-जुलाई के दौरान अपनी नौकरी गंवा दी।
थरूर ने कहा कि कांग्रेस की तरफ से कई रचनात्मक सुझाव दिए गए थे, लेकिन सरकार ने इन पर अमल नहीं किया। इन सुझावों में लोगों के खातों में पैसे डाले जाने का सुझाव प्रमुख था, लेकिन इसको भी क्रियान्वित नहीं किया गया।
हक दीपक
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