नयी दिल्ली, 13 जून संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया 2030 तक लैंगिक समानता हासिल करने की ओर नहीं बढ़ रही है। रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि लैंगिक समानता के खिलाफ आंदोलनों ने जोर पकड़ा है और दुनिया के कई हिस्सों में महिलाओं के अधिकारों में कटौती हुई है।
संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा साल 2015 में स्वीकार किए गए सतत विकास एजेंडा में 2030 तक लैंगिक समानता हासिल करने की समय सीमा तय की गई थी।
‘जेंडर सोशल नॉर्म्स इंडेक्स’ (जीएसएनआई) की नवीनतम रिपोर्ट से पता चला है कि एक दशक में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव में कोई सुधार नहीं हुआ है और दुनिया भर में 10 में से लगभग नौ पुरुष और महिलाएं आज भी इस तरह का पूर्वाग्रह रखते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बुनियादी क्षमताओं में महिलाओं के लिए काफी प्रगति हासिल की गई है जबकि महिलाओं की आवाज और उनकी शक्ति आदि के मामले में प्रगति कमजोर रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों के अलावा शीर्ष राजनीतिक पदों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है और 1995 से राष्ट्र या शासन के प्रमुखों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत है, जो उन्हें 21वीं सदी में निर्णय लेने वालों में हाशिये पर रखती है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में आधे लोग अब भी मानते हैं कि पुरुष महिलाओं की तुलना में बेहतर राजनीतिक नेता होते हैं और 40 प्रतिशत से अधिक लोग मानते हैं कि पुरुष महिलाओं की तुलना में बेहतर व्यावसायिक कार्यकारी होते हैं।
रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि ऐसे पूर्वाग्रह महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं को बढ़ाते हैं और कुछ देशों में उनके मानवाधिकर हनन के मामले भी बढ़े हैं।
इसमें कहा गया है कि महिलाएं पहले से कहीं अधिक कुशल और शिक्षित हैं, फिर भी उन 59 देशों में जहां महिलाएं अब पुरुषों की तुलना में अधिक शिक्षित हैं, वहां भी महिलाओं की तुलना में पुरुषों की ही आय अधिक बनी हुई है।
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