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जमानत राशि नहीं दे पाने वाले विचाराधीन कैदियों को निजी मुचलके पर रिहा किया जाए: अदालत

वैश्विक महामारी कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने के उद्देश्य से उच्च स्तरीय समिति ने जेलों में भीड़ कम करने के लिए विचाराधीन कैदियों को रिहा करने का सुझाव दिया था।

जमानत राशि नहीं दे पाने वाले विचाराधीन कैदियों को निजी मुचलके पर रिहा किया जाए: अदालत

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ऐसे सभी विचाराधीन कैदियों को निजी मुचलके पर रिहा करें जिन्हें जमानत तो मिल चुकी है लेकिन वे जमानत राशि नहीं दे पा रहे हैं।

वैश्विक महामारी कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने के उद्देश्य से उच्च स्तरीय समिति ने जेलों में भीड़ कम करने के लिए विचाराधीन कैदियों को रिहा करने का सुझाव दिया था।

न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने ये निर्देश उच्च स्तरीय समिति के सुझावों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए दिए।

गौरतलब है कि देश में कोविड-19 के कारण अब तक 169 लोगों की मौत हो चुकी है और 5,865 लोग संक्रमित हैं।

यह निर्देश उन विचाराधीन कैदियों पर लागू होगा जिन्हें सात अप्रैल या इससे पहले जमानत दी गई है।

समिति ने मंगलवार की बैठक में कहा था कि इन कैदियों के जमानत आदेशों में बदलाव दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायिक आदेश के जरिए ही किया जा सकता है।

दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिमा कोहली की अध्यक्षता वाली समिति में यह बात उठी थी कि कई विचाराधीन कैदी ऐसे हैं जो जमानत मिलने के बावजूद जेलों में ही हैं क्योंकि वे इसकी राशि नहीं दे पा रहे हैं।

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 09, 2020 08:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).