देश की खबरें | शीर्ष अदालत ने गुजरात में बार के नेता यतिन ओझा की क्षमा याचना का संज्ञान लिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने गुजरात में बार के नेता यतिन ओझा की अवमानना मामले में बिना शर्त माफी का बृहस्पतिवार को संज्ञान लेते हुये कहा कि उच्च न्यायालय उनके खिलाफ लंबित अवमानना कार्यवाही के दौरान इस पर विचार करेगा। उच्च न्यायालय ने ओझा की आलोचनात्मक टिप्पणियों के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी से उन्हें वंचित कर दिया था।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, छह अगस्त उच्चतम न्यायालय ने गुजरात में बार के नेता यतिन ओझा की अवमानना मामले में बिना शर्त माफी का बृहस्पतिवार को संज्ञान लेते हुये कहा कि उच्च न्यायालय उनके खिलाफ लंबित अवमानना कार्यवाही के दौरान इस पर विचार करेगा। उच्च न्यायालय ने ओझा की आलोचनात्मक टिप्पणियों के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी से उन्हें वंचित कर दिया था।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने अवमानना कार्यवाही में यतिन ओझा की वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी वापस लेने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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इस मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान ओझा और वकीलों ने कहा कि उनके बयान ‘अनावश्यक थे जिसके लिये उन्हें बहुत खेद है।’’ पीठ ने इस मामले में विस्तृत आदेश देने के बाद इसे 26 अगस्त को आगे सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया।

उच्च न्यायालय ने अपने पूर्ण अदालत के निर्णय में गुजरात उच्च न्यायालय एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष यतिन ओझा को प्रदान की गयी वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी वापस लेने का फैसला किया था। इससे पहले, न्यायालय ने फेसबुक पर आयोजित प्रेस कॉन्ंफ्रेस में उच्च न्यायालय और उसकी रजिस्ट्री के बारे में कथित टिप्पणियों का संज्ञान लिया था।

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पीठ ने ओझा की याचिका पर सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा, ‘‘अवमानना कार्यवाही अभी भी लंबित है और पूर्ण अदालत तथा हमारे समक्ष भी अवमानना कार्यवाही में बिना शर्त क्षमायाचना के मद्देनजर हम यह उचित समझते हैं कि पहले अवमानना अदालत को इस विषय पर विचार करना चाहिए। याचिकाकर्ता (ओझा) को यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि उन्होंने बिना शर्त माफी मांग ली है और अवमानना कार्यवाही में भी बिना शर्त माफी मांग लेंगे और इस कार्यवाही को बंद करने का अनुरोध करेंगे।’’

पीठ ने अपने आदेश में आगे कहा, ‘‘हम इस तथ्य का जिक्र कर सकते हैं कि याचिकाकर्ता खुद भी हमारे समक्ष शर्मिन्दा है और कह रहा है कि उसे उन शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था जिनका उसने किया और उन परिस्थितियों में आवेश में आकर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर लिया जब हर कोई कोविड-19 की समस्या से जूझ रहा है और बार के युवा सदस्यों की भी परेशानियां हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हमने उनसे सवाल किया कि शिकायतें हो सकती हैं लेकिन उन्हें बेहतर तरीके से पेश किया जा सकता है। व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है लेकिन अनावश्यक रूप से लांछन नहीं लगाये जाने चाहिए थे।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वह पूर्ण अदालत के समक्ष प्रतिवेदन में कहेगा कि मौजूदा अवधि के लिये उसे उसके गाउन से वंचित करना उनके लिये पर्याप्त सजा है।

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