नयी दिल्ली, 19 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने लोकपाल के उस आदेश पर बुधवार को स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ शिकायतों पर विचार किया गया था।
न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति अभय एस ओका की पीठ स्वत: संज्ञान वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी।
लोकपाल ने उच्च न्यायालय के एक वर्तमान अतिरिक्त न्यायाधीश के खिलाफ दायर दो शिकायतों पर यह आदेश पारित किया था। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने राज्य के एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश और उसी उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को, जिन्हें एक निजी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई करनी थी, उस कंपनी के पक्ष में प्रभावित किया।
यह आरोप लगाया गया है कि निजी कंपनी, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की मुवक्किल थी, जब वह (न्यायाधीश) वकालत के पेशे में थे।
अपने आदेश में, लोकपाल ने निर्देश दिया था कि इन दोनों मामलों में रजिस्ट्री में प्राप्त विषयगत शिकायतें और संबद्ध सामग्री भारत के प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय को उनके विचारार्थ भेजी जाए।
न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली लोकपाल पीठ ने 27 जनवरी को कहा था, ‘‘हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि इस आदेश के द्वारा हमने इस मुद्दे पर अंतिम रूप से निर्णय कर दिया है कि क्या संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 2013 के अधिनियम की धारा 14 के दायरे में आते हैं।’’
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