नयी दिल्ली, 24 जून राज्यसभा सचिवालय ने पुष्टि की है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शेखर यादव को उनके ‘घृणास्पद भाषण’ के लिए पद से हटाने के संबंध में प्रस्ताव लाने का नोटिस देने वाले 55 सांसदों में से 45 सदस्यों के हस्ताक्षर का सत्यापन हो गया है जबकि कपिल सिब्बल और आठ अन्य ने अब तक अपने हस्ताक्षरों का सत्यापन नहीं किया है।
सिब्बल नोटिस पर शीघ्र कार्रवाई के लिए मुखर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा सचिवालय से ऐसा कोई ईमेल नहीं मिला है, जिसमें पुष्टि की गई हो कि पिछले छह महीनों के दौरान उनके आधिकारिक ईमेल पर तीन बार नोटिस भेजा गया है।
सिब्बल ने हस्ताक्षरों के सत्यापन की आवश्यकता और मार्च में देरी से प्रक्रिया शुरू करने में पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में नोटिस 13 दिसंबर 2024 को प्रस्तुत किया गया था।
न्यायमूर्ति यादव को हटाने के लिए 55 सांसदों ने प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन उनमें से एक सदस्य सरफराज अहमद के हस्ताक्षर नोटिस पर दो बार दिखाई दे रहे हैं। राज्यसभा सचिवालय जांच कर रहा है कि नोटिस पर उनके हस्ताक्षर दो बार कैसे दिखाई दे रहे हैं और क्या वे जाली हैं।
सूत्रों ने बताया कि झारखंड से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सांसद अहमद इस मुद्दे पर पहले ही राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से मिल चुके हैं और इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने दो बार नहीं बल्कि केवल एक बार हस्ताक्षर किए हैं।
राज्यसभा सूत्रों ने कहा कि सदन में न्यायमूर्ति शेखर यादव को हटाने की मांग करने वाले नोटिस के संबंध में आचार समिति और विशेषाधिकार समिति द्वारा आपराधिक जांच की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि दस्तावेज पर ‘‘जाली’’ हस्ताक्षर हैं।
सूत्रों ने बताया कि न्यायमूर्ति यादव को हटाने के लिए 55 विपक्षी सांसदों द्वारा प्रस्तुत नोटिस पर तारीख नहीं है और ये किसी को संबोधित नहीं है।
संविधान के अनुच्छेद-124 के अनुसार उच्च न्यायापालिका के किसी न्यायाधीश को सेवा से तभी हटाया जा सकता है जब संसद के दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव को वर्तमान सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी दे दी जाए। इसके बाद राष्ट्रपति को इसे मंजूरी देनी होती है। राज्यसभा में ऐसा प्रस्ताव तभी लाया जा सकता है जब 50 सदस्यों के हस्ताक्षर हों। लोकसभा के लिए 100 सदस्यों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व केंद्रीय मंत्री और अब निर्दलीय राज्यसभा सदस्य सिब्बल ने पिछले छह महीनों में अपने आधिकारिक ईमेल पर तीन बार अनुस्मारक भेजने के बाद भी अब तक राज्यसभा सचिवालय के समक्ष अपने हस्ताक्षर का सत्यापन नहीं कराया है।
सिब्बल ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘मैंने सभापति धनखड़ से कई बार मुलाकात की है, लेकिन उन्होंने न्यायमूर्ति यादव को हटाने के नोटिस पर मेरे हस्ताक्षरों के सत्यापन का मुद्दा कभी नहीं उठाया जबकि पूरी प्रक्रिया का प्रस्तुतकर्ता और आरंभकर्ता मैं ही हूं।’’
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