विदेश की खबरें | नए प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए पाकिस्तान नेशनल असेंबली का सत्र शुरू

इस्लामाबाद, 11 अप्रैल इस्तीफे के कारण पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सांसदों की स्थिति पर अनिश्चितता के बीच नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए पाकिस्तान नेशनल असेंबली का अहम सत्र सोमवार को शुरू हो गया।

विपक्षी उम्मीदवार और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज शरीफ और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के उपाध्यक्ष तथा पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी नया प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में हैं।

खान को सत्ता से हटाने के लिए विपक्ष ने 174 वोट जुटाए थे। अगर विपक्ष इतनी संख्या जुटा लेता है तो 70 वर्षीय शहबाज पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री होंगे।

सत्र की शुरुआत से कुछ मिनट पहले, पूर्व सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि पीटीआई के सभी सांसद नेशनल असेंबली से इस्तीफा दे देंगे और किसी भी सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे, जो ‘‘विदेशी एजेंडे’’ के तहत बनाई जा रही है। इमरान खान ने भी यही आरोप लगाते हुए कहा था अमेरिका उनकी सरकार गिराने की साजिश में शामिल था।

चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री चुनाव से पहले पार्टी के सांसदों की बैठक में यह फैसला लिया गया। कुरैशी के सफल होने की बहुत कम संभावना है क्योंकि उनकी पार्टी सदस्यों के दलबदल से कमजोर हो गई है।

पाकिस्तान के 342 सदस्यीय सदन में जीतने वाले उम्मीदवार को कम से कम 172 सांसदों का समर्थन मिलना चाहिए। शहबाज का समर्थन कर रहे संयुक्त विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव में अपेक्षित संख्या दिखाई है।

इस बीच, संयुक्त विपक्ष द्वारा ऐतिहासिक अविश्वास प्रस्ताव के बाद रविवार को कैबिनेट डिवीजन ने संघीय मंत्रिमंडल के 52 सदस्यों को गैर-अधिसूचित कर दिया। पीटीआई की आपत्तियों को खारिज किए जाने के बाद नेशनल असेंबली सचिवालय ने शहबाज के नामांकन पत्र को स्वीकार कर लिया। कुरैशी का नामांकन पत्र भी स्वीकार कर लिया गया।

सोमवार के लिए नेशनल असेंबली के सचिवालय द्वारा जारी सदन के एजेंडे के अनुसार प्रधानमंत्री का चुनाव होना है। पीटीआई के वरिष्ठ नेता बाबर अवान ने शहबाज की उम्मीदवारी को चुनौती देते हुए कहा था कि पीएमएल-एन प्रमुख को कई अदालती मामलों का सामना करना पड़ा है।

राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो ने 2019 में शहबाज और उनके बेटे हमजा शरीफ पर धन शोधन का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार किया था। सदन के नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया रविवार को खान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से हटाए जाने के बाद शुरू हुई।

पाकिस्तान 1947 में अस्तित्व में आने बाद से कई शासन परिवर्तन और सैन्य तख्तापलट के साथ राजनीतिक अस्थिरता से जूझता रहा है। किसी भी प्रधानमंत्री ने कभी भी पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)