विदेश की खबरें | भीषण गर्मी हमारी जैविक प्रणाली में बदलाव लाती,यह हमे काफी तेजी से बूढ़ा बना सकती है: शोध
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

मेलबर्न, दो मार्च (द कन्वरसेशन) गर्मी आपकी सारी ऊर्जा खत्म कर देती है। एक लंबे, गर्म दिन में हम थका हुआ और चिड़चिड़ा महसूस करते हैं। लेकिन लगातार गर्मी की अवधि इससे कहीं ज्यादा ऊर्जा खत्म करती है- वह हमें तेजी से बूढ़ा बनाती है।

गर्मी से होने वाला तनाव हमारे ‘एपिजेनेटिक्स’ को बदल देता है। ‘एपिजेनेटिक्स’ एक शारीरिक प्रक्रिया होती है, जिसमें हमारी कोशिकाएं पर्यावरणीय दबाव का सामना करते हुए ‘जीन’ को सक्रिय या निष्क्रिय कर देती हैं।

अमेरिका में हुए नए शोध में इस महत्वपूर्ण प्रश्न का जवाब तलाशा गया कि अत्यधिक गर्मी मनुष्यों को किस तरह प्रभावित करती है। इसके निष्कर्ष चिंताजनक हैं। शोध के दौरान एक प्रतिभागी ने जितने ज्यादा दिन तक भीषण गर्मी झेली, उतनी ही तेजी से वह अपनी वास्तविक उम्र के मुकाबले अधिक उम्र के दिखने लगे। लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी में रहने वाले बुजुर्ग अपनी वास्तविक उम्र के मुकाबले और अधिक (दो साल से अधिक) बुजुर्ग हो जाते हैं।

जैसे-जैसे जलवायु गर्म होगी, मनुष्य अधिकाधिक गर्मी के संपर्क में आएंगे - और हमारा शरीर इन तनावों का सामना करते हुए तेजी से वृद्ध होगा। ये निष्कर्ष विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के लिए प्रासंगिक हैं, जहां गर्म होती दुनिया में ग्रीष्म लहरों के अधिक बार आने और तीव्र होने की आशंका है।

आखिर गर्मी हमें बूढ़ा कैसे बनाती है?

उम्र बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन बूढ़ा होने की दर हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है। जैसे-जैसे हम जीवन में आगे बढ़ते हैं, हमारे शरीर पर तनाव और आघातों का असर होता है। उदाहरण के लिए, अगर हम लंबे समय तक पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो हम तेजी से बूढ़े हो जाएंगे।

गर्मी हमें सीधे बीमार कर सकती है या मार सकती है, लेकिन इसकी एक लंबी प्रक्रिया होती है। लगातार गर्मी हमारे शरीर पर दबाव डालती है और जीवित रहने के लिए आवश्यक कई कार्यों को करने में कम कुशल बनाती है।

आनुवंशिक स्तर पर चीजें कैसी दिखती हैं? आप सोच सकते हैं कि आपके जीन जीवन भर नहीं बदलते, और यह (यादृच्छिक उत्परिवर्तनों को छोड़कर) काफी हद तक सच है ।

लेकिन जो चीज बदलती है वह यह है कि आपके जीन किस तरह से काम करते हैं। यानी, जबकि आपका डीएनए तो वही रहता है, लेकिन आपकी कोशिकाएं तनाव के जवाब में अपने हजारों जीन में से कुछ को निष्क्रिय या सक्रिय कर सकती हैं। किसी भी समय, किसी भी कोशिका में जीनों का केवल एक अंश ही सक्रिय होता है - अर्थात वे प्रोटीन बनाने में व्यस्त होते हैं।

इसे ‘एपिजेनेटिक्स’ के नाम से जाना जाता है। इस मामले में डीएनए मिथाइलेशन (डीएनएएम) को समझने की जरूरत है।

यहां मिथाइलेशन से तात्पर्य एक रसायन से है जिसका उपयोग हमारी कोशिकाएं डीएनए अनुक्रम को विभिन्न कार्यों वाले प्रोटीनों को उत्पादन व सक्रिय होने से रोक सकती हैं।

डीएनएएम में कोशिकीय परिवर्तन के कारण प्रोटीन का उत्पादन कम या ज्यादा हो सकता है, जो बदले में शारीरिक कार्यों और हमारे स्वास्थ्य की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। यह बुरा या अच्छा दोनों हो सकता है। गर्मी से होने वाले तनाव से जीन के निष्क्रिय या सक्रिय होने का तरीका बदल सकता है, जिससे हमारे बूढ़ा होने की दर प्रभावित हो सकती है।

कोशिकाओं में भीषण गर्मी से उत्पन्न तनाव बरकरार रह सकता है, जिससे समय के साथ उनके डीएनएएम पैटर्न में बदलाव होता है। प्रयोगशाला परीक्षण में, मछली, मुर्गियों, गिनी पिग और चूहों में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया है।

आज तक, इस बात पर बहुत शोध किया गया है कि गर्मी ‘एपिजेनेटिक्स’ को कैसे प्रभावित करती है, यह जानवरों और पौधों पर केंद्रित है। शोध में, अत्यधिक गर्मी के एक दौर से चूहों पर लंबे समय तक रहने वाले प्रभाव देखे गए हैं।

लेकिन मनुष्यों पर कुछ ही अध्ययन किए गए हैं, और वे सीमित हैं। यह नया शोध इसी कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है।

अध्ययन में क्या पाया गया? दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में लगभग 3,700 लोग शामिल थे, जिनकी औसत आयु 68 वर्ष थी।

युवा लोगों की तुलना में बुजुर्गों पर गर्मी का ज्यादा असर पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता कम होती जाती है, और हम बाहरी तनावों व आघातों का सामना करने के प्रति हम कमजोर पड़ जाते हैं। हम यह भी जानते हैं कि अत्यधिक गर्मी के कारण बीमारी और मृत्यु हो सकती है, खास तौर पर बुजुर्गों में।

अध्ययन का उद्देश्य यह बेहतर ढंग से समझना था कि जब मानव शरीर अल्प, मध्यम और दीर्घ अवधि तक भीषण गर्मी के संपर्क में रहता है तो जैविक स्तर पर उसके साथ क्या होता है।

ऐसा करने के लिए, शोधकर्ताओं ने रक्त के नमूने लिए और जीनोम में हजारों जगहों पर एपिजेनेटिक परिवर्तनों को मापा। इसका उपयोग तीन जैविक आयु चक्रों ‘पीसीफेनोएज’,‘पीसीग्रिमएज’ और ‘ड्यूनेडिनपेस’ को मापने के लिए किया गया।

इसके बाद, उन्होंने पिछले छह वर्षों, अर्थात् 2010-16, के दौरान प्रत्येक प्रतिभागी के भौगोलिक क्षेत्र में गर्मी के स्तर का पता लगाया।

उन्होंने गर्मी का आकलन करने के लिए अमेरिकी ताप सूचकांक का उपयोग किया। इस दौरान सावधानी (32 डिग्री सेल्सियस तक के दिन), अत्यधिक सावधानी (32-39 डिग्री सेल्सियस) और खतरे (39-51 डिग्री सेल्सियस) का आकलन किया गया।

उन्होंने यह देखने के लिए प्रतिगमन (रिग्रेशन) मॉडलिंग का उपयोग किया कि लोग सामान्य दर की तुलना में कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं।

गर्मी का असर तीनों जैविक आयु चक्रों में स्पष्ट दिखाई दिया। अध्ययन के अनुसार पीसीफेनोएज आयु चक्र में, लंबे समय तक भीषण गर्मी के संपर्क में रहने से छह वर्ष की अवधि में जैविक आयु 2.48 वर्ष बढ़ गई। वहीं पीसीग्रिमएज चक्र में आयु 1.09 वर्ष और ‘ड्यूनेडिनपेस’ में 0.05 वर्ष बढ़ गई।

अध्ययन के दौरान यह प्रभाव बूढ़ा होने की सामान्य दर की तुलना में 2.48 वर्ष अधिक तेज था।

यह नया शोध इस बात पर प्रकाश डालता है कि गर्मी हमें किस हद तक बूढ़ा बनाती है।

जैसे-जैसे भविष्य में गर्मी बढ़ेगी, हमारी ‘एपिजेनेटिक्स’ प्रतिक्रिया में बदलाव होता जाएगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)