(तस्वीरों के साथ)
भिलाई, 18 सितंबर छत्तीसगढ़ में ‘स्टील सिटी’ भिलाई के मध्य भाग में घूमने पर एक सुंदर आवासीय कॉलोनी दिखती है, जो 1970 के दशक के अंत में रूसी नागरिकों के लिए बसाई गई थी।
दोनों ओर कतारबद्ध हरे-भरे पेड़-पौधों से युक्त चौड़ी सड़कों के मध्य स्थित ‘रूसी कॉम्प्लेक्स’ नामक आवासीय परिसर अब भी मजबूती से अपनी मौजूदगी दर्शाता है, जो भारत और रूस के बीच के बंधन का प्रतीक है। हालांकि, वहां अब कोई रूसी नहीं रहता है।
राजधानी रायपुर से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस परिसर का इतिहास भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से जुड़ा है, जो 1950 के दशक में तत्कालीन सोवियत संघ के सहयोग से देश में स्थापित पहली एकीकृत इस्पात इकाइयों में से एक है।
भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 1959 में अविभाजित मध्य प्रदेश के भिलाई में इस इस्पात संयंत्र का उद्घाटन किया था, जो अब छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित है।
बड़ी संख्या में बिहार, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों से लोग इस संयंत्र में नौकरी के लिए आकर्षित हुए, जिसके चलते एक महानगरीय संस्कृति के साथ ही कई अन्य सुविधाओं से लैस ‘भिलाई क्षेत्र आवासीय परिसर’ का उदय हुआ।
बीएसपी के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि संयंत्र के निर्माण में रूसी प्रौद्योगिकी की मदद ली गई थी, ऐसे में उस देश के तकनीशियन और विशेषज्ञ भी यहां चार दशकों से अधिक समय तक रहे और संयंत्र में काम किया।
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