देश की खबरें | जम्मू कश्मीर आरक्षण कानून के खिलाफ 2006 में दायर याचिका खारिज

नयी दिल्ली, 28 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को एक जनहित याचिका को बंद कर दिया, जो लगभग 16 साल पहले 2005 के जम्मू कश्मीर आरक्षण कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती देते हुए दायर की गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि 2019 में राज्य के पुनर्गठन के बाद स्थिति ‘‘काफी बदल गई’’ है।

शीर्ष अदालत ने 4 दिसंबर, 2006 को तत्कालीन राज्य सरकार और केंद्र को मुनीलाल नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया था जिसमें आरक्षण कानून की वैधता के संबंध में कुछ मुद्दे उठाए गए थे।

प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने राज्य का दर्जा केंद्र शासित प्रदेश में बदलने का उल्लेख किया और कहा कि अब किसी भी केंद्र शासित प्रदेश पर लागू नियम एवं कानूनी प्रावधान जम्मू कश्मीर पर लागू होंगे।

पीठ ने कहा, ‘‘रिट याचिका दायर करने के बाद से जो घटनाक्रम हुआ है, उसे देखते हुए, हम याचिकाकर्ताओं को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हैं और कानून के ज्ञात तरीके से उचित कार्यवाही करने या शुरू करने की स्वतंत्रता देते हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘आज, यह एक केंद्र शासित प्रदेश है। अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में जो प्रचलित है, वह यहां भी लागू होना चाहिए।’’

इसके बाद जनहित याचिका को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया गया।

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