नयी दिल्ली, 31 मार्च छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिए उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित राष्ट्रीय कार्य बल (एनटीएफ) ने अपना काम शुरू कर दिया है और वह अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए जनता की राय लेगा।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने 24 मार्च को पारित आदेश में उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों का संज्ञान लिया था और छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने तथा ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एनटीएफ का गठन किया था।
शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के उन दो छात्रों के परिजनों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश भी दिया था, जिन्होंने 2023 में आत्महत्या कर ली थी।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस रवींद्र भट की अध्यक्षता वाले एनटीएफ में डॉ. आलोक सरीन, प्रोफेसर मैरी ई जॉन, अरमान अली, प्रोफेसर राजेंद्र काचरू, डॉ. अक्सा शेख, डॉ. सीमा मेहरोत्रा, प्रोफेसर वर्जिनियस जाक्सा, डॉ. निधि सभरवाल और अपर्णा भट्ट जैसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हैं।
उच्च शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय सहित प्रमुख सरकारी विभागों के पदेन सदस्य भी इस एनटीएफ का हिस्सा हैं।
एनटीएफ ने 29 मार्च 2025 को आयोजित अपनी पहली बैठक में उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के आत्महत्या करने के मूल कारणों का पता लगाने और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशों के साथ एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने की अपनी योजना के बारे में बताया था।
कार्य बल को अंतरिम रिपोर्ट पेश करने के लिए चार महीने का और अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए आठ महीने का समय दिया गया है।
रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में सार्वजनिक विचार-विमर्श, शैक्षणिक संस्थानों के साथ बातचीत और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों, छात्रों एवं अभिभावकों के साथ चर्चा शामिल होगी।
एनटीएफ जनता की सहभागिता को प्रोत्साहित करने और उसके सुझाव हासिल करने के लिए एक वेबसाइट तथा सोशल मीडिया हैंडल भी पेश करेगा।
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