नयी दिल्ली, चार अगस्त लोकसभा ने शुक्रवार को विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ‘भारतीय प्रबंध संस्थान संशोधन विधेयक, 2023’ को मंजूरी दी। इसके माध्यम से भारतीय प्रबंध संस्थान अधिनियम 2017 में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।
निचले सदन में विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिए रखते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से मुंबई स्थित राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान (नीति) को भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) का दर्जा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह संस्थान 1963 से चल रहा है जो तकनीकी-प्रबंधन पाठ्यक्रम में विशेषज्ञता रखता है।
प्रधान ने कहा कि विधेयक में संस्थान को बिना वित्तीय बोझ के आईआईएम का दर्जा देने का प्रस्ताव है।
विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जगदंबिका पाल और वाईएसआर कांग्रेस के लावू कृष्णा देवरायालू ने भाग लिया।
देवरायालू ने इन संस्थाओं में अकादमिक स्वायत्ता से जुड़े कुछ विषय उठाये।
सदन में संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए प्रधान ने आईआईएम संस्थानों की अकादमिक स्वायत्तता को लेकर देवरयालू की आशंकाओं को खारिज कर दिया।
शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘ हम इस सदन में वचन देते हैं कि सरकार आईआईएम की अकादमिक स्वायत्तता में कोई हस्तक्षेप नहीं रखेगी।’’
उन्होंने कहा कि इस तरह के संस्थान सरकार के अनुदान से चलते हैं और इन्हें निजी संस्थान नहीं बनने दिया जा सकता, इसलिए इनके प्रबंधन को सरकार देखेगी लेकिन अकादमिक स्वायत्तता बनाकर रखी जाएगी।
शिक्षा मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने ‘भारतीय प्रबंध संस्थान संशोधन विधेयक, 2023’ को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इस दौरान विपक्षी सदस्य मणिपुर के मुद्दे पर शोर-शराबा कर रहे थे।
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारण में कहा गया है कि वर्ष 1961 में भारत सरकार ने कलकत्ता और अहमदाबाद में दो भारतीय प्रबंध संस्थान स्थापित करने का निश्चय किया था। इन विशेषज्ञ संस्थानों के माध्यम से भारत में प्रबंध प्रशिक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में तेजी लाने की परिकल्पना की गई थी। ऐसे संस्थानों की मांग में वृद्धि होने के कारण बंगलोर (अब बेंगलुरु), लखनऊ, इंदौर और कोझीकोड में भारतीय प्रबंध संस्थान स्थापित किए गए थे।
इसके अनुसार 11वीं योजना में शिलांग, रांची, रोहतक, रायपुर, काशीपुर, तिरूचिरापल्ली और उदयपुर में नए भारतीय प्रबंध संस्थान स्थापित किए गए। वहीं वर्ष 2015-16 के दौरान अमृतसर, बोधगया, जम्मू, नागपुर, संभलपुर, सिरमौर और विशाखापट्टनम में भारतीय प्रबंध संस्थान स्थापित किए गए।
इसके बाद, अधिनियम के माध्यम से संस्थानों को डिग्रियां प्रदान करने, संस्थानों के शासन को एकसमान बनाने और बोर्ड संचालन के लिए सशक्त बनाया गया है और उन्हें शैक्षिक स्वायत्तता का प्रयोग करने में समर्थ बनाया है।
इसमें कहा गया है कि देश में शीर्षस्थ प्रबंध संस्थानों में से एक होने के बावजूद मुंबई स्थिति उक्त संस्थान डिग्रियां प्रदान करने में असमर्थ है जिससे संस्थान के पक्षकारों खासकर छात्रों की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि इस परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान, मुंबई को अधिनियम के अधीन लाने एवं संबंधित विषयों पर चर्चा करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। समिति ने उक्त संस्थान को अधिनियम में सम्मिलित करने की मजबूती से सिफरिश की है।
इसमें कहा गया है कि 2017 के अधिनियम की धारा 10 में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है जिसके माध्यम से केंद्र सरकार को संचालक बोर्ड के निलंबन या विघटन की स्थिति में एक अंतरिम बोर्ड गठित करने का अधिकार होगा। इसके तहत भारत के राष्ट्रपति प्रत्येक संस्थान के कुलाध्यक्ष (विजिटर) होंगे।
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