देश की खबरें | न्यायाधीशों की समिति ने फिलहाल उच्चतम न्यायालय में प्रत्यक्ष सुनवाई की संभावना से इनकार किया
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नयी दिल्ली, 25 जुलाई उच्चतम न्यायालय के सात न्यायाधीशों की समिति ने फिलहाल उच्चतम न्यायालय में प्रत्यक्ष या आमने-सामने सुनवाई नहीं करने के अपने फैसले से बार काउंसिल के नेताओं को अवगत करा दिया है और समिति दो सप्ताह बाद एक बार फिर बैठक कर इस विषय पर पुनर्विचार करेगी।
शीर्ष अदालत 25 मार्च से लॉकडाउन के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई कर रही है और पाबंदियों में ढील दिये जाने के बाद भी न्यायालय ने डिजिटल सुनवाई ही जारी रखने का फैसला किया है।
प्रधान न्यायाधीश के बाद सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने बार काउंसिल के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा, उच्चतम न्यायालय बार संघ के अध्यक्ष दुष्यंत दवे और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवाजी जाधव से शुक्रवार को मुलाकात की और उन्हें प्रत्यक्ष सुनवाई बहाल नहीं करने के अपने फैसले से अवगत कराया।
दवे ने बैठक के बारे में वकीलों को लिखे पत्र में बताया, ‘‘प्रारंभ में उच्चतम न्यायालय के महासचिव ने न्यायाधीशों की समिति की बैठक का बिंदुवार ब्योरा पढ़ा जो पहले हो चुकी है और जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह पर फिलहाल प्रत्यक्ष सुनवाई के लिए उच्चतम न्यायालय को नहीं खोलने का फैसला लिया गया है।’’
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उन्होंने लिखा, ‘‘न्यायाधीशों ने दो सप्ताह बाद पुन: बार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके चरणबद्ध तरीके से अदालत का कामकाज बहाल करने के बारे में तय करने का फैसला किया है।’’
दवे ने पत्र में बताया, ‘‘हमने माननीय न्यायाधीशों को न्याय, वादियों, वकीलों और उनके मुंशियों के हित में सुनवाई फिर से शुरू करने की जरूरत के बारे में बताया और विश्वास दिलाया कि किसी भी तरीके से सभी हितधारकों के स्वास्थ्य से समझौता किये बिना इस तरह से कामकाज बहाल किया जा सकता है।’’
उन्होंने कहा कि समिति ने आश्वासन दिया कि महासचिव और रजिस्ट्रार अंतिम सुनवाई के लिए मामलों को श्रेणीबद्ध करने और संबंधित विषयों पर बातचीत करेंगे।
शीर्ष अदालत में प्रत्यक्ष सुनवाई बहाल होने के मुद्दे पर विचार करने के लिए प्रधान न्यायाधीश द्वारा गठित समिति में न्यायमूर्ति रमन, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति रोहिंगटन नरीमन, न्यायमूर्ति यू यू ललित, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल एन राव शामिल हैं।
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