विदेश की खबरें | कोविड-19 जांच के गलत नतीजों के असर का मूल्यांकन करना होगा : वैज्ञानिक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड-19 जांच किट से होने वाली जांच से गलत रिपोर्ट आने के मामलों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि यह महामारी को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

वाशिंगटन, सात जून वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड-19 जांच किट से होने वाली जांच से गलत रिपोर्ट आने के मामलों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि यह महामारी को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सरकारी एजेंसियों को सुझाव दिया है कि वे निर्माताओं को जांच की दक्षता संबंधी जानकारी मुहैया कराएं।

यह भी पढ़े | पाकिस्तान ने 2020 के दौरान दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई देखी: स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान.

अमेरिका के डार्टमाउथ स्थिति द जिसेल स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने कहा कि बड़े पैमानों पर जांच की कमी अर्थव्यवस्थाओं को दोबारा खोलने में प्रमुख बाधा है।

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित विश्लेषण शोधपत्र में वैज्ञानिकों ने कहा कि जांच का दायरा बढ़ाने में प्रगति हुई है लेकिन नतीजों की परिशुद्धता अब भी चिंता का विषय है।

यह भी पढ़े | Justice For George Floyd: शिकागो में 20,000 लोगों ने 'Chicago March of Justice' में लिया हिस्सा.

द जिसेल स्कूल ऑफ मेडिसिन से संबद्ध और शोधपत्र के प्रमुख लेखक स्टीवन वोलोशिन ने कहा, ‘‘ संक्रमण का पता लगाने के लिए होने वाली जांच में गले और नाक से लिए गए नमूनों का इस्तेमाल होता है और यह दो तरीकों से गलत हो सकता है।’’

उन्होंने कहा, गलती से नमूने पर संक्रमित होने का लेबल लगाने पर व्यक्ति को अनावश्यक रूप से पृथकवास में रहने, उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान जैसे असर हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक मौजूदा जांच किट के सटीक नतीजे आने की दर काफी हद तक कम है। उन्होंने कहा कि पिछले अध्ययनों के मुताबिक इन किट की संवेदलशीलता 70 प्रतिशत तक हो सकती है।

शोधपत्र में वैज्ञानिकों ने लिखा, ‘‘संवेदनशीलता के आधार और जांच से पहले 50 प्रतिशत सटीक नतीजे आने की संभावना के आधार पर जांच के बाद 23 फीसदी मामलों में संक्रमण का पता नहीं चलने की आशंका है। यह किसी को संक्रमण मुक्त मानने के स्तर से कहीं अधिक है।

वोलोशिन ने कहा, ‘‘ गलती से निगेटिव नतीजे आने का दुष्प्रभाव अधिक होगा क्योंकि बिना लक्षण वाले व्यक्ति को पृथकवास में नहीं रखा जाएगा और वह अन्य लोगों को भी संक्रमित करेगा।’’

वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण में मौजूदा जांच किट की सीमाओं पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि इन जांच किटों की संवेदनशीलता में अंतर और जांच को प्रमाणित करने के लिए मानक प्रक्रिया की अनुपस्थिति चिंता का विषय है।

विभिन्न अध्ययनों की समीक्षा करने के आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में संक्रमितों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं जो चिंता का विषय है।

वैज्ञानिकों ने 957 कोरोना संक्रमितों या संक्रमण के संदिग्धों पर किए गए अध्ययन की समीक्षा करते हुए कहा कि जांच के गलत नतीजे आने की आशंका दो से 29 प्रतिशत तक है।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने कहा कि यह पुख्ता सबूत नहीं है क्योंकि इन मरीजों की जांच के तरीके स्पष्ट नहीं है।

शोधकर्ताओं ने जांच किट को लेकर किए गए समीक्षा अध्ययन के आधार पर कहा कि आम तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे आरटी-पीसीआर किट से लगातार आ रहे गलत नतीजे चिंता का विषय है। हालांकि, इस संबंध में सबूत बहुत ही सीमित हैं।

वोलोशिन ने कहा, ‘‘ जांच देश को खोलने में मदद कर सकती है लेकिन यह तभी हो सकता है जब जांच उच्च मानकों के आधार पर सवेंदनशील और प्रमाणिक हो। अन्यथा हम पूरे भरोसे से किसी व्यक्ति को संक्रमणमुक्त नहीं घोषित कर सकते हैं।’’

शोधकर्ताओं ने कहा कि औषधि मंजूरी एजेंसियों जैसे अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किट निर्माताओं को नतीजों की सटीकता संबंधी जानकारी मुहैया कराई जाए खासतौर पर बाजार में बेचने की अनुमति देने की प्रक्रिया के दौरान।

उन्होंने कहा कि बिना लक्षण वाले मरीजों में जांच नतीजों की सटीकता त्वरित प्राथमिकता है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\