नयी दिल्ली, 26 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपनी अलग रह रही पत्नी के परिवार की वित्तीय स्थिति की आयकर जांच कराए जाने की मांग करते हुए दावा किया था कि उसकी पत्नी के परिवार ने दो करोड़ रुपये दहेज में दिये थे और शादी पर काफी धन खर्च किया था।
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने 19 फरवरी को कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिका अलग रह रहे दंपती के बीच ‘‘वैवाहिक झगड़े’’ के कारण दायर की गई।
अदालत ने कहा कि व्यक्ति के वकील यह बताने में असमर्थ रहे कि याचिकाकर्ता के किस मौलिक या वैधानिक अधिकार का उल्लंघन किया गया था।
पीठ ने कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि वर्तमान याचिका याचिकाकर्ता और उसकी पत्नी के बीच वैवाहिक झगड़े के कारण दायर की गई है।’’
उसने साथ ही कहा कि इस मामले से जुड़े तथ्यों पर निर्णय लेना आयकर विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं होगा।
उसने कहा, ‘‘इसी प्रकार, तथ्यों के ऐसे विवादित प्रश्नों पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत भी निर्णय नहीं लिया जा सकता।’’
व्यक्ति ने आयकर विभाग को यह निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया था कि वह उसकी अलग रह रही पत्नी के परिवार द्वारा शादी में खर्च की गई राशि के अलावा दो करोड़ रुपये के कथित अवैध नकद लेनदेन की जांच करे।
उसने परिवार के पिछले 10 साल के आयकर रिटर्न और वित्तीय रिकॉर्ड का सत्यापन करने का भी अनुरोध किया तथा झूठी गवाही, कर चोरी या वित्तीय कदाचार के मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया।
याचिकाकर्ता की 2022 में शादी हुई थी लेकिन यह विवाह सफल नहीं रहा और उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
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