नयी दिल्ली, चार जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने कापसहेड़ा स्थित हनुमान और शनि मंदिर को ध्वस्त करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने दीपांशु यादव की याचिका पर दिल्ली सरकार से स्थिति रिपोर्ट सौंपने को कहा है। यादव ने याचिका में दावा किया है कि छावला नाले पर बने मंदिर को ध्वस्त करने से लोगों की भावनाएं प्रभावित होंगी।
याचिकाकर्ता ने कहा कि कापसहेड़ा के उपजिलाधिकारी द्वारा 12 जून को मंदिर को ध्वस्त करने के लिए छह जून को जारी आदेश बिना किसी कारण और न्यायाधिकार क्षेत्र से परे जाकर पारित किया गया।
दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने कहा इलाके में अतिक्रमण किया गया है और ‘धार्मिक समिति’ ने पहले ही ध्वस्तीकरण को मंजूरी दे दी है।
याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे अधिवक्ता आनंद और अनुज चौहान ने कहा कि उनका मुवक्किल भगवान हनुमान और शनि का भक्त है और रोजाना उक्त मंदिर में पूजा अर्चना करने जाता है लेकिन ‘‘ किसी भी तरह से मंदिर यातायात में बाधा उत्पन्न नहीं कर रहा है।’’
याचिका में कहा गया, ‘‘प्रतिवादी संख्या (एसडीएम) के मनमाने कृत्य से उक्त स्थान पर परेशान करने वाली स्थिति उत्पन्न हो सकती है जहां पर बहुत पहले से धार्मिक ढांचा है। प्रतिवादी संख्या दो के कृत्य से लोग प्रभावित होंगे क्योंकि लोगों की भावना उक्त मंदिर से जुड़ी हुई है।’’
याचिका के मुताबिक, ‘‘याचिकाकर्ता चिंतित है कि करीब 50 साल पुराने मंदिर को स्थानांतरित करने के लिए कोई वार्ता/व्यवस्था नहीं की गई।’’
इस मामले की अब अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी।
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