देश की खबरें | बिहार के राज्यपाल ने एल 20 शिखर सम्मेलन का उदघाटन किया

पटना, 22 जून बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने जी 20 की भारत की अध्यक्षता के तहत एल 20 (श्रम भागीदारी समूह) के दो दिवसीय सम्मेलन का बृहस्पतिवार को उद्घाटन किया।

सम्मेलन में कुल मिलाकर 28 देशों के 173 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। जी20 देशों के अलावा भारत ने अपनी अध्यक्षता के तौर पर बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस, नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।

राज्यपाल ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘आपको बिहार में देखकर मुझे गर्व हो रहा है। यहां उपस्थित गणमान्य व्यक्ति कुल आबादी का लगभग 75 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बिहार के लिए गर्व का क्षण है।’’

उन्होंने पूर्वी राज्य के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा, ‘‘बिहार का इतिहास हजारों साल पुराना है। यह ज्ञान की भूमि है जहां विभिन्न राष्ट्रीयता वाले छात्र नालंदा विश्वविद्यालय में ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। वैशाली को लोकतंत्र की जननी भी माना जाता है। आज जरूरत मानवीय मूल्यों को महत्व देने की है। यदि हम मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत हैं तो न केवल श्रम जगत बल्कि संपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन मजबूत होगा।’’

सभा को संबोधित करते हुए एल 20 के अध्यक्ष हिरण्मय पंड्या ने कहा, ‘‘मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि एल 20 न केवल जी 20 देशों की आवाज का प्रतिनिधित्व करेगा बल्कि यह निश्चित रूप से उन देशों की आवाज का भी प्रतिनिधित्व करेगा जिनके प्रतिनिधि इसमें उपस्थित नहीं हैं।’’

सम्मेलन के तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव आरती आहूजा ने देश में सामाजिक सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों पर चर्चा की। तकनीकी सत्र के दौरान सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा और उससे संबंधित मसौदे पर चर्चा की गई।

अर्थशास्त्री संतोष मेहरोत्रा ने जी 20 के संदर्भ में सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा के वित्तपोषण की चर्चा की। उन्होंने विषय के विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए एक पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी।

मेहरोत्रा ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के कन्वेंशन 102 की वर्तमान स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण भी प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा, ‘‘आईएलओ द्वारा सामाजिक सुरक्षा के नौ क्षेत्रों की पहचान की गई जिसमें चिकित्सा देखभाल, बीमारी, बेरोजगारी, बुढ़ापा, रोजगार के दौरान दुर्घटनाएं, परिवार की देखभाल, मातृत्व अवकाश और उत्तरजीविता शामिल हैं।’’

चर्चा में भाग लेते हुए श्रमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष विरजेश उपाध्याय ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा को केवल सरकार और उद्योग जगत की जिम्मेदारी नहीं माना जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि इसे समाज की भागीदारी से हासिल किया जाना चाहिए।

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