पणजी, नौ फरवरी प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोदकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि लक्ष्य दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की बजाय भारतीयों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का होना चाहिए।
पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित डॉक्टर काकोदकर ने मडगांव में ‘इंडियन साइंस: 75 इयर्स एंड बियॉन्ड’ विषय पर आधारित फोमेंटो वेद विचार व्याख्यान श्रृंखला में कहा कि यदि भारत को ‘विश्वगुरु’ बनना है तो विज्ञान और प्रौद्योगिकी उसमें प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘आम भारतीयों का जीवन स्तर दुनिया में सबसे बेहतर होना चाहिए। अगर यह सीधी सी बात आपके विकास का उद्देश्य है, तो मुझे लगता है कि पीछे-पीछे सबकुछ संभव हो जाएगा।’’
भारत की आर्थिक प्रगति के बारे में 79 वर्षीय वैज्ञानिक ने कहा कि देश वर्तमान में ज्ञान के युग में है और ‘‘वर्तमान परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था का विकास होना स्वाभाविक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि औसत भारतीयों के जीवन स्तर की गुणवत्ता की तुलना दुनिया के सर्वश्रेष्ठ जीवन स्तर से की जा सकती है। वहां तक पहुंचने के लिए, हमें वास्तव में प्रति व्यक्ति आय को लक्षित करना चाहिए और उसमें सर्वश्रेष्ठ बनना चाहिए।’’
काकोदकर ने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को अमेरिका और चीन जैसे देशों की तुलना में बहुत व्यापक बनाना होगा, जोकि बहुत बड़ा लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि भारतीय शैक्षणिक संस्थानों को विश्व सूची में शीर्ष 100 या 200 में स्थान नहीं मिलना चिंताजनक है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY