नयी दिल्ली, एक दिसंबर नए लोगो को लेकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि आयुर्वेद के जनक माने जाने वाले हिंदू देवता धन्वंतरि की तस्वीर वाला आयोग का लोगो एक साल से ज्यादा समय से चलन में है और “डेढ़ महीने पहले इसमें (लोगो में) सिर्फ इंडिया शब्द को भारत से बदला गया है”।
एनएमसी के आचार और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड के सदस्य तथा मीडिया प्रभाग के प्रमुख डॉ. योगेंद्र मलिक ने कहा कि तत्कालीन भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) के लोगो में एक यूनानी देवी का प्रतीक था।
मलिक ने कहा कि व्यापक विचार विमर्श के बाद लगभग डेढ़ साल पहले एनएमसी ने धन्वंतरि वाले लोगो का निर्णय किया जिन्हें अपने देश में चिकित्सा का देवता माना जाता है।
उन्होंने कहा, “धन्वंतरि की छवि पहले श्वेत-श्याम रंग में थी। एनएमसी की हालिया बैठक में रंगीन छवि लगाने का फैसला किया गया। छवि अब स्पष्ट है।”
उन्होंने कहा, “हमारे लोगो के रूप में भारत का राष्ट्रीय चिन्ह कभी नहीं था। पहले हमारे पास कोई लोगो नहीं था। लगभग एक साल पहले ही एनएमसी सुझाव प्राप्त करने के बाद लोगो लेकर आया था। एक साल से ज्यादा समय तक लोगो में धन्वंतरि का लोगो श्वेत-श्याम में था और हमें महसूस हुआ कि हमें इसे रंगीन करने की जरूरत है। तो यही एकमात्र परिवर्तन है जो हुआ है। मुझे आलोचना (की वजह) समझ नहीं आती।”
मलिक ने कहा कि एकमात्र बदलाव यह हुआ है कि “इंडिया” शब्द को “भारत” से बदल दिया गया है।
आयोग से बृहस्पतिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के केरल चैप्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि एनएमसी लोगो में हालिया बदलाव स्वीकार्य नहीं है।
आईएमए केरल के अध्यक्ष डॉ. सूल्फी नूहु ने कहा कि एनएमसी के लोगो में एक धर्मनिरपेक्ष संदेश और सोचने का तरीका अधिक उपयुक्त और स्वीकार्य होता।
अपने धर्मनिरपेक्ष विचारों के लिए जाने जाने वाले डॉक्टर ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि आईएमए का राष्ट्रीय नेतृत्व लोगो परिवर्तन के खिलाफ कड़ा विरोध जताएगा।
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