नयी दिल्ली, एक जून निर्वाचन आयोग ने अनेक चुनौतियों से पार पाते हुए मतदान केंद्रों तक पहुंचकर मतदान करने वाले मतदाताओं के प्रति शनिवार को ‘गहरी कृतज्ञता’ व्यक्त की।
आयोग ने यह टिप्पणी लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के लिए मतदान के बाद की। चुनाव की घोषणा 16 मार्च को की गई थी, जबकि पहला चरण 19 अप्रैल को हुआ था।
निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा, "भारतीय मतदाताओं ने 18वीं लोकसभा के गठन के लिए अपने सबसे प्रिय अधिकार का प्रयोग किया है। भारतीय लोकतंत्र और भारतीय चुनाव ने एक बार फिर कमाल किया है। महान भारतीय मतदाताओं ने जाति, पंथ, धर्म, सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक पृष्ठभूमि से परे जाकर एक बार फिर यह कर दिखाया है।"
निर्वाचन आयोग ने कहा कि असली विजेता भारतीय मतदाता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार, निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू तथा निर्वाचन आयोग परिवार "मतदाताओं के प्रति बहुत आभारी हैं, जो अनेक चुनौतियों से पार पाते हुए मतदान केंद्र तक पहुंचे।"
आयोग ने कहा कि वह सभी मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करना चाहता है। आयोग ने कहा, "अपनी जोरदार भागीदारी के माध्यम से मतदाताओं ने भारतीय संविधान के संस्थापकों द्वारा व्यक्त किये गए उस विश्वास को बरकरार रखा है, जो उन्होंने आम भारतीय को मताधिकार का अधिकार सौंपने समय जताया था।"
निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा बलों सहित सम्पूर्ण चुनाव मशीनरी के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने भीषण गर्मी, दुर्गम क्षेत्रों जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए तथा विविध जनसांख्यिकी में कानून और व्यवस्था का प्रबंधन करते हुए, पूरे देश में मतदाताओं को सुचारू, शांतिपूर्ण माहौल प्रदान करने में समर्पण और प्रतिबद्धता दिखायी।
आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को भी धन्यवाद दिया और उन्हें भारतीय चुनाव का महत्वपूर्ण आधार बताया। आयोग ने मीडिया को भी उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया।
बयान कहा गया है, "सौ वर्ष से अधिक आयु वाले, बुजुर्ग, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर द्वारा डाले गए वोट का महत्व कई लोगों, खासकर युवाओं के लिए प्रेरणादायी है, जो लोकतंत्र को और आगे ले जाएंगे।"
इसने कहा, "मतदान के दौरान मतदाताओं, राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, चुनाव कर्मियों और सुरक्षा बलों के सामूहिक प्रयासों ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत किया है, जो बहुत सम्मान और प्रशंसा के योग्य है।"
उसने कहा, "हम लोगों ने सामूहिक प्रयासों के कारण लोकतंत्र के पहियों को घुमाए रखा है।"
सीईसी कुमार पिछले दो वर्षों से संसदीय चुनावों की व्यक्तिगत रूप से तैयारी कर रहे थे।
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