नयी दिल्ली, आठ मार्च कमजोर वैश्विक रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को खाद्यतेलों के दाम में गिरावट जारी रही तथा सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट देखने को मिली वहीं दूसरी ओर सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात लगभग 2.25 प्रतिशत टूटा था और फिलहाल यहां मामूली सुधार है। जबकि मलेशिया एक्स्चेंज में 0.6 प्रतिशत की गिरावट है।
सूत्रों ने कहा कि आयात किये जाने वाले सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के दाम, दो तीन माह पहले के मुकाबले आधे से अधिक टूट चुके हैं लेकिन देश के उपभोक्ताओं को इस गिरावट का लाभ नहीं मिल पा रहा है क्योंकि खुदरा बिक्री करने वाली कंपनियां पहले से ही इन तेलों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) काफी ऊंचा रखती हैं जिससे मौजूदा गिरावट का सही लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। खुदरा विक्रेता डब्बे पर छपे एमआरपी दिखाकर ग्राहकों से अधिक कीमत वसूल कर लेते हैं।
सूत्रों ने कहा कि एमआरपी की व्यवस्था को सरकार दुरुस्त कर दे तो सब ‘‘दूध का दूध और पानी का पानी’’ हो जायेगा। इस मर्ज का इलाज खोजा जाना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि एकआरपी की व्यवस्था को अगर दुरुस्त कर दिया जाये और एक सीमा तक ही अधिक एमआरपी रखने की व्यवस्था लागू हो जाये तो पांच से छह साल में ही देश तेल तिलहन मामले में आत्मनिर्भर होने की ओर बढ़ जायेगा।
सूत्रों ने कहा कि खाद्यतेल कीमतों में मामूली वृद्धि के समय सट्टेबाज और विदेशी तेल कंपनियां जानबूझ कर ऐसा हौव्वा खड़ा करते हैं कि इससे महंगाई बढ़ेगी और फिर सरकार भी मुद्रास्फीति के दवाब बढ़ने की आशंका में कोई पहल नहीं कर पाती। इस असमंजस की स्थिति से देश के किसान, तेल उद्योग सभी जूझते हैं और नतीजतन एक ओर तिलहन पैदावार नहीं बढ़ती दूसरी ओर विदेशों से आयात करने की परंपरा बनी रहती है।
सूत्रों ने कहा कि मामूली महंगा होने के बावजूद अगर किसानों को तिलहन के दाम अच्छे मिलते हैं तो वह धन हमारी अर्थव्यवस्था में ही आता है जिसका किसान फिर से बाजार में निवेश करेंगे। वैसे तो प्रति व्यक्ति खाद्यतेल की खपत के मुकाबले अधिक खपत तो दूध का होता है और खाद्यतेल से मिलने वाले खल के महंगा होने से हाल के महीनों में दूध की कीमतें कई बार बढ़ी है। लेकिन इससे होने वाली महंगाई को लेकर कोई नहीं बोलता क्योंकि देश के दूध के कारोबार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की दखल कमजोर है।
सूत्रों ने कहा कि देशी तेल तिलहनों का उत्पादन बढाने से हमें पसंदीदा खाद्यतेल के अलावा तेल खल और डीआयल्ड केक (डीओसी) भी प्राप्त होगा। खाद्यतेल आयात पर खर्च होने वाले भारी मात्रा में विदेशीमुद्रा की बचत होगी। आयात पर निर्भरता घटेगी। देश में तेल मिलों का कामकाज सुचारू ढंग से चलने के कारण रोजगार बढ़ेंगे।
नरम तेल- चावल भूसी तेल (राइसब्रान) का दाम 80 रुपये लीटर, आयातित सूरजमुखी तेल का दाम बंदरगाह पर 89 रुपये लीटर और आयातित सोयाबीन तेल का दाम 91 रुपये लीटर रह गया है। इस परिस्थिति के बारे में कोई क्यों नहीं बोलता कि इससे देशी तेल तिलहन कैसे खपेंगी।
सूत्रों ने कहा कि जो देश (भारत) अपनी जरूरत के लगभग 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर हो वहां के किसानों की तिलहन उपज बाजार में न खपे यह एक विरोधाभास की स्थिति है। सरकार को पहले देशी तेल तिलहनों का बाजार बनाने और उसके अनुरूप सारी नीतियों को तय करना चाहिये।
सूत्रों ने कहा कि सामान्य कारोबार के बीच सरसों और मूंगफली तेल तिलहन के भाव अपरिवर्तित रहे। सस्ते आयात के बढ़ने और लिवाली कमजोर होने से सोयाबीन तेल तिलहनों में गिरावट रही। सस्ते आयात की भरमार और लिवाल कम रहने के अलावा मलेशिया एक्सचेंज की गिरावट के कारण सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में मामूली गिरावट आई। इसके अलावा सस्ते आयातित तेलों के आगे मांग कमजोर रहने से बिनौला तेल कीमतों में भी गिरावट आई।
बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,370-5,420 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,825-6,885 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,700 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,560-2,825 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 11,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,765-1,795 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,725-1,850 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 11,850 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 11,480 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,180 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 9,020 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,940 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,480 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,540 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,290-5,420 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,030-5,050 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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