नयी दिल्ली, तीन मार्च उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि पिछले साल डीएमआरसी-डीएएमईपीएल विवाद पर उसके फैसले का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए, अन्यथा वह निजी फर्म और एक्सिस बैंक के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) और एक्सिस बैंक से कहा, ‘‘लुका-छिपी खेलने की क्या जरूरत है? जब फैसला आ गया है, तो आपको उसका अक्षरशः पालन करना चाहिए।’’
एक्सिस बैंक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि बैंक छह साल तक विवाद के पक्ष में नहीं था और अब अचानक उसे भुगतान के लिए अवमानना का नोटिस मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि बैंक विवाद में केवल ‘एस्क्रो’ खाता संचालित कर रहा था। पीठ ने यह भी कहा कि उसे बैंक के दावे और प्रतिदावे से कोई सरोकार नहीं है।
मामले को स्थगित करने वाली पीठ ने कहा कि वह डीएएमईपीएल सहित प्रतिवादियों को फैसले का अक्षरशः पालन करने की सलाह दे रही है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी ने कहा कि सभी आदेश एक्सिस बैंक के खिलाफ पारित किए गए थे और यह नहीं कहा जा सकता कि उन्हें कार्यवाही की जानकारी नहीं थी।
पीठ ने वेंकटरमानी से व्यक्तियों के नाम और उनके पदों का मिलान करने को कहा। साथ ही कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अदालत दंडात्मक कार्रवाई करेगी।
पिछले साल दिसंबर में शीर्ष अदालत ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी डीएएमईपीएल और एक्सिस बैंक के निदेशकों को पिछले साल अप्रैल में शीर्ष अदालत के फैसले के अनुसार डीएमआरसी को लगभग 2,500 करोड़ रुपये वापस नहीं करने के लिए अवमानना नोटिस जारी किया था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY