नयी दिल्ली, 14 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सुपरिभाषित कानूनों/नियमों को लागू करने के निर्देश संबंधी याचिका पर कुछ राज्यों की ओर से समय पर जवाबी हलफनामा दाखिल न करने पर मंगलवार को नाराजगी व्यक्त की और कहा कि बहस पूरी करना एक "कठिन कार्य" है।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले में निर्धारित सुनवाई से ठीक एक दिन पहले हलफनामे दाखिल किए जा रहे हैं। पीठ ने कहा, ‘‘बहस पूरी करना एक कठिन कार्य हैं।’’
पीठ में न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार भी शामिल हैं।
पीठ को सूचित किया गया कि शीर्ष अदालत की कार्यालय रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कुछ राज्यों ने अपना जवाबी हलफनामा दायर नहीं किया है। शीर्ष अदालत ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि कुछ राज्यों ने या तो जवाबी हलफनामा दायर नहीं किया है, या इसे देर से दाखिल किया है।
पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 28 मार्च की तारीख निर्धारित की और कहा कि उन राज्यों के संबंधित मंत्रालय के सचिवों को वर्चुअल मोड के माध्यम से इसके समक्ष उपस्थित रहना होगा।
पिछले साल नवंबर में इस मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्यों को चार सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करने का आखिरी मौका दिया था।
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