देश की खबरें | न्यायायल ने मुंबई के तीन जैन मंदिरों में पर्यूषण पर्व पर प्रार्थना की अनुमति दी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 21 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कोविड-19 महामारी के बारे में बने दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश के साथ मुंबई के तीन जैन मंदिरों में पर्यूषण पर्व पर श्रृद्धालुओं को दो दिन प्रार्थना की अनुमति प्रदान की।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की तीन सदस्यीय पीठ ने मुंबई में तीन जैन मंदिरों में प्रार्थना की अनुमति देने के साथ ही स्पष्ट किया कि ‘गणपति महोत्सव’ के लिये अनुमति देने का निर्णय महाराष्ट्र आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मामला दर मामला के आधार पर करेगा।

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पीठ ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में आने वाले गणपति महोत्सव का मामला एकदम भिन्न है और इसे नियंत्रित करना मुश्किल होगा और हम इस स्थिति को समझते हैं लेकिन इस मामले में स्थिति भिन्न है।’’

न्यायालय ने मुंबई के दादर, बायकला और चेम्बूर स्थित जैन मंदिरों में पर्यूषण पर्व पर दो दिन पूजा अर्चना की अनुमति देते हुये स्पष्ट किया कि मुंबई में इनके अलावा किसी अन्य जैन मंदिर में पूजा की अनुमति नहीं दी जायेगी।

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पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से ‘श्री पार्श्वतिलक श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन ट्रस्ट’ की अपील पर सुनवाई के दौरान पर्यूषण पर्व पर मुंबई के तीन जैन मंदिरों में प्रार्थना की अनुमति दी। इस ट्रस्ट ने बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी।

उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर 15 से 23 अगस्त के दौरान आठ दिवसीय पर्यूषण पर्व के लिये मुंबई में जैन मंदिरों को खोलने की अनुमति नहीं देने के महाराष्ट्र सरकार के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

शीर्ष अदालत ने जैन ट्रस्ट के आश्वासन पर विचार किया कि दो दिन के इस कार्यक्रम के दौरान मंदिरों में केन्द्र के दिशानिर्देशों और प्रोटोकाल का पालन किया जायेगा।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘संबंधित पक्षों की दलीलों पर सावधानीपूर्वक विचार के बाद हमारी राय है कि इसे कोई नजीर बनाये बगैर याचिकाकर्ताओं को छोटी सी राहत दी जा सकती है। वैसे भी याचिकाकर्ता समाधान में कोई उत्सव मनाने की अनुमति नहीं मांग रहे हैं।’’

पीठ ने कहा कि ट्रस्ट अंतरिम उपाय के तौर पर मुंबई के बायकुला, दादर (पश्चिम) और चेम्बूर में स्थित एक एक मंदिर सिर्फ दो दिन के लिये 22 और 23 अगस्त को खोलने का अनुरोध कर रहा है। ट्रस्ट आश्वासन भी दे रहा है कि एक बार में सिर्फ पांच श्रृद्धालुओं को और पूरे दिन में सिर्फ 250 श्रृद्धालुओं को ही प्रवेश की अनुमति दी जायेगी।

पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘इसलिए, इस मामले के तथ्य और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये याचिकाकर्ताओं को इन तीन मंदिरों को 22 और 23 अगस्त को पर्यूषण से संबंधित पूजा अर्चना करने के लिये खोलने की अनुमति दी जा रही है।’’

न्यायालय ने आश्वासन पर सख्ती से पालन करने का आदेश देते हुये कहा, ‘‘इस आदेश का कोई अन्य व्यक्ति गणेश महोत्सव जैसे किसी ऐसे पर्व , जिसमे बड़ी संख्या में लोग शामिल हों, के आयोजन की अनुमति के लिये नजीर के रूप में इस्तेमाल नहीं करेगा। ’’

न्यायालय ने कहा कि इन मंदिरों में किसी भी समय लोगों के समागम की अनुमति नहीं होगी और सिर्फ पांच व्यक्तियों को ही इसमें प्रवेश और मंदिर के अंदरूनी हिस्से में रहने की अनुमति होगी।

ट्रस्ट ने कहा कि मंदिर में रोजाना सिर्फ 250 श्रृद्धालुओं तक प्रवेश सीमित रहेगा और धर्म स्थलों में 12 से 65 साल की आयु वर्ग के लोगों को ही प्रवेश दिया जायेगा।

इससे पहले, पीठ ने शुरू में ही संकेत दिया कि पुरी की जगन्नाथ यात्रा की तरह ही पूजा अर्चना की अनुमति दी जा सकती है बशर्ते याचिकाकर्ता आश्वासन दें कि कोविड-19 के बारे में प्रोटोकाल का पालन किया जायेगा।

न्यायालय ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को प्रत्येक मामले की स्थिति के आधार पर निर्णय लेना होगा और यदि एक समय में जैन मंदिर में पांच व्यक्ति जाते हैं तो इससे कोई परेशानी पैदा नहीं होगी।

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि महाराष्ट्र में 40 लाख से अधिक जैन रहते हैं। इनमें से अकेले मुंबई में ही करीब पांच लाख जैन हैं। ऐसी स्थिति में यह मसला कार्यपालिका पर छोड़ दिया जाये क्योंकि उसे सभी के हित ध्यान में रखने हैं।

अनूप

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