देश की खबरें | स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ने की लागत कम हुई है: ऑक्सफोर्ड अध्ययन में दावा

नयी दिल्ली, 14 सितंबर ऑक्सफोर्ड के एक नये अध्ययन में दावा किया गया है कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना इस दिशा में धीमी गति होने या परिवर्तन ही नहीं होने से ज्यादा किफायती है और यह धारणा बिल्कुल गलत है कि हरित ऊर्जा को अपनाना महंगा है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार मौजूदा स्तर पर जीवाश्म ईंधन ऊर्जा का इस्तेमाल करते रहने की तुलना में वर्ष 2050 के आसपास तक कार्बन रहित ऊर्जा तंत्र को अपनाने से कम से कम 12 हजार अरब डॉलर तक बच सकते हैं।

अध्ययन के अनुसार, ‘‘परंपरागत ईंधन प्रणाली की तुलना में स्वच्छ ऊर्जा की ओर त्वरित परिवर्तन से ऊर्जा लागत कम होती है, वहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था में अधिक ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है तथा दुनिया की बड़ी आबादी तक ऊर्जा की पहुंच का विस्तार किया जा सकता है।’’

स्मिथ स्कूल ऑफ एंटरप्राइजेज एंड एनवॉयरमेंट में अनुसंधानकर्ता रूपर्ट वे ने कहा, ‘‘जीरो कार्बन ऊर्जा की ओर हस्तांतरण में अधिक लागत के पूर्वानुमान वाले पहले के मॉडल के कारण कंपनियां निवेश से सकुचाती रही हैं और सरकारें नीतियां बनाने में भी संकोच करती रही हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन पिछले दशक में स्वच्छ ऊर्जा की लागत तेजी से कम हुई है। ये उन मॉडलों के अनुमान की तुलना में बहुत तेजी से घटी है।’’

अनुसंधानकर्ताओं ने अध्ययन के लिए बड़े ऊर्जा मॉडल के अनुसार ऊर्जा प्रणाली परिवर्तन की लागत के हजारों परिदृश्यों का विश्लेषण किया तथा सौर ऊर्जा लागत के 45 वर्ष, पवन ऊर्जा लागत के 37 वर्ष एवं बैटरी स्टोरेज के 25 वर्ष के आंकड़ों का उपयोग किया।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)