जरुरी जानकारी | सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा की अवधारणा भारत के अनुकूल नहींः मुख्य आर्थिक सलाहकार

लखनऊ, नौ जून मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को 'सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा' की अवधारणा को खारिज करते हुए कहा कि इससे लोगों के लिए धरातल पर ‘विकृत प्रोत्साहन’ का आधार तैयार होगा और उन्हें आय-सृजन के अवसर तलाशने से रोकेगा।

नागेश्वरन ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा का विचार भारत जैसे प्रगतिशील देशों के लिए ठीक नहीं हैं, जहां लोगों की आकांक्षाओं को सुरक्षित रखने के लिए आर्थिक वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।

नागेश्वरन ने कहा, “हमारे देश में जहां स्वाभाविक आर्थिक वृद्धि को कई लोगों की आकांक्षाओं का ख्याल रखना चाहिए, वहां पर यह जरूरी नहीं हो सकता है। संभव है कि हम लोगों को ऐसे अवसरों की तलाश में खुद कोशिश नहीं करने देकर उनके लिए विकृत प्रोत्साहन का आधार तैयार कर दें। इसलिए भारत के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा निकट भविष्य के एजेंडे में नहीं होनी चाहिए।”

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सहयोग मिलना चाहिए जो आर्थिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते। ऐसे लोगों को उस बिंदु पर लाया जाए जहां वे अर्थव्यवस्था से सार्थक रूप से जुड़ सकें।

सीईए ने कहा कि भारत अभी उस स्तर पर नहीं पहुंचा है जहां सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा नैतिक या आर्थिक जरूरत हो।

गौरतलब है कि पूर्व सीईए अरविंद सुब्रमण्यन ने नरेन्द्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान नागरिकों को एकसमान भत्ता देने का विचार रखा था।

सुब्रमण्यन ने आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में प्रत्येक वयस्क या बच्चे, अमीर या गरीब को सार्वभौमिक मूल आय (यूबीआई) या सार्वभौमिक भत्ता देने का प्रस्ताव दिया था।

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