नयी दिल्ली, 23 जनवरी गुजरात में पूर्ववर्ती मध्याह्न भोजन योजना के तहत स्कूली बच्चों के लिये अपनाये गए ‘तिथि भोजन’ कार्यक्रम की तर्ज पर केंद्र सरकर ने इसे देश के सभी राज्यों में शुरू करने का सुझाव दिया है।
केंद्र ने कहा है कि पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना में सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से अतिरिक्त भोजन के रूप में महीने में कम से कम एक बार स्कूल के सभी बच्चे साथ बैठ कर पारंपरिक खाना खाएं।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा बीते दिसंबर महीने के कैबिनेट संबंधी संक्षिप्त नोट में कहा गया है कि पीएम पोषण योजना के दिशानिर्देश को अंतिम रूप दिया गया है और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा गया है।
पीएम पोषण योजना के दिशानिर्देशों के मसौदे में कहा गया है कि पूर्ववर्ती मध्याह्न भोजन योजना के तहत स्कूली बच्चों के लिये गुजरात सरकार ने ‘तिथि भोजन’ कार्यक्रम शुरू किया था। इसमें त्योहारों, वर्षगांठ, जयंती, जन्मदिन, राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण दिवसों आदि पर बच्चों को अतिरिक्त भोजन के रूप में पोषक आहार देने के कार्यक्रम को बढ़ावा दिया गया था।
मसौदे में कहा गया है कि यह कार्यक्रम स्वैच्छिक रहा है और इसमें सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया गया । इस कार्यक्रम में समुदाय के लोग फल, अंकुरित खाद्य, नमकीन, मिठाई आदि का योगदान करते है । यह स्कूल में दिये जाने वाले भोजन के अतिरिक्त होता है।
मसौदे के अनुसार, ऐसे में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पीएम पोषण) में सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिये तिथि भोजन के सिद्धांत को सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू करने की पहल की जा रही है।
इसमें कहा गया है कि इस कार्यक्रम के तहत समुदाय के लोग बर्तनों के अलावा फल, अंकुरित खाद्य, नमकीन, मिठाई आदि अतिरिक्त खाद्य सामग्री या पूरा भोजन प्रायोजित कर सकते हैं।
सरकार का मानना है कि इससे सभी समुदाय के बच्चों में बराबरी का भाव विकसित होगा।
इससे पहले, वर्ष 2014 में शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों से विभिन्न माध्यमों के जरिये ऐसे कार्यक्रम को प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया था। कई राज्यों में स्कूलों में अलग रूपों में इस तरह के कार्यक्रम जारी हैं। इसमें गुजरात में ‘तिथि भोजन’, असम में ‘सम्प्रीति भोजन’, आंध्र प्रदेश में ‘बिन्दू भोजनम’, पंजाब में ‘प्रीति भोजन’ के अलावा दादरा नगर हवेली एवं दमन दीव में ‘तिथि भोजन’, कर्नाटक में ‘शालेगागी नावूनेवू’, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र में ‘स्नेह भोजन’, राजस्थान में ‘उत्सव भोज’, तमिलनाडु में ‘नाल विरूंधू’, पुडुचेरी में ‘अन्न धानम’ आदि शामिल हैं।
इसमें यह भी कहा गया है कि समुदाय के जिन लोगों ने सर्वाधिक योगदान दिया हो, उन्हें गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस जैसे मौकों पर सम्मानित किया जाना चाहिए।
दीपक
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