अहमदाबाद, 19 दिसंबर गुजरात उच्च न्यायालय को मंगलवार को सूचित किया गया कि नडियाड में कचरा फेंकने के स्थान पर मिले 30 से अधिक गायों एवं अन्य पशुओं के शव पुराने थे, और उन मवेशियों के नहीं थे जिन्हें गोशाला में रखा गया था।
न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री और न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक की खंडपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें अदालत की अवमानना के लिए सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। अदालत ने मवेशियों की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए एक जनहित याचिका पर निर्देश दिए थे।
पिछली सुनवाई के दौरान, अदालत को लगभग 30 गायों की मौत के बारे में सूचित किया गया था जिन्हें कथित तौर पर जब्त कर गोशालाओं में रखा गया था।
उच्च न्यायालय ने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए निर्दोष जानवरों की बलि नहीं दी जा सकती है और स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी।
एक हलफनामे में, नडियाड नगर निकाय के मुख्य अधिकारी रुद्रेश हुदाद ने कहा कि दो दिसंबर को कचरा फेंकने के स्थान का एक निरीक्षण किया गया था, उसी दिन अखबार में खबर छपी थी।
इसमें कहा गया है कि परीक्षण करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि शव 20-22 दिन पुराने थे और घटनास्थल पर गाय, भैंस, गधे आदि सहित 35-40 जानवरों के कंकाल थे।
हलफनामे में कहा गया है, नडियाड शहर या आस-पास के गांवों के पशुपालकों से जानवरों के चोरी होने या किसी बीमारी के फैलने के संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई, जिससे इतने कम समय में बड़ी संख्या में पशुओं की अचानक मृत्यु हो जाए।
उसमें कहा गया है कि अखबार की रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से गलत है, क्योंकि केवल सात जब्त मवेशियों की मौत हुई है, और कचरा फेंकने वाले स्थल पर मिले जानवरों के कंकाल गोशाला में रखे गए जानवरों के नहीं थे।
अदालत मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर को करेगी।
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