कोलकाता, 29 जुलाई तृणमूल कांग्रेस के मुखपत्र में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की सदस्य और पार्टी की बंगाल इकाई के दिवंगत सचिव अनिल विश्वास की बेटी अजंता विश्वास द्वारा लिखे गये एक आलेख से यहां इस वामपंथी दल की भृकुटि तन गयी है।
तृणमूल के मुखपत्र ‘जागो बांग्ला’ में अजंता विश्वास के आलेख के दो खंड बुधवार एवं बृहस्पतिवार को प्रकाशित हुए। माकपा के एक नेता ने कहा कि पार्टी में कई लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या उन्होंने (अजंता विश्वास ने) प्रतिद्वंद्वी दल के मुखपत्र में प्रकाशन के लिए अपना आलेख देने से पहले पार्टी नेतृत्व से अनुमति ली थी।
‘बांगो राजनीतिते नारिर भूमिका’ विषयक आलेख के पहले खंड में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय की इतिहास विषय की प्रोफेसर अजंता विश्वास ने देशभक्त सरोजनी देवी एवं बसंती देवी की चर्चा की है। दूसरे खंड में उन्होंने स्वतंत्रता कार्यकर्ता प्रतिलता वाड्डेदार एवं कल्पना दत्ता तथा उन महिलाओं के बारे में लिखा है जिन्होंने क्रांतिकारियों को अपने घरों में शरण देकर उनकी परोक्ष रूप से मदद की।
तृणमूल सूत्रों ने बताया कि तीसरे अंक, जो इस सप्ताह बाद में आएगा, में राज्य की राजनीति के बाद के चरण को शामिल किये जाने की संभावना है और उसमें ममता बनर्जी जैसे नेताओं का काल भी होगा।
महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में वामपंथी शिक्षक संघों की सदस्य अजंता विश्वास से इस संबंध में टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं हो पाया है।
तृणमूल प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि किसी भी आलेख को उसकी सामग्री और समृद्ध ऐतिहासिक संदर्भों न कि लेखक के पिता या उसकी राजनीतिक पहचान के आधार पर आंका जाना चाहिए।
घोष ही तृणमूल के मुखपत्र का कामकाज देखते हैं और 21 जुलाई से इसे दैनिक के तौर पर पेश किया गया।
माकपा की प्रदेश समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने पीटीआई- से कहा, ‘‘ मुझे इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहना है। ’’
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