Sarpanch Murder Case: सरपंच हत्या मामले में फरार आरोपी ‘ट्रांसजेंडर’ लोगों के बीच छिपा है; तृप्ति देसाई

सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने दावा किया है कि बीड के सरपंच रहे संतोष देशमुख की हत्या मामले में फरार वांछित आरोपी कृष्णा अंधाले कर्नाटक सीमा के पास ‘ट्रांसजेंडर’ व्यक्तियों के बीच छिपा हुआ है.

santosh deshmukh (img: tw)

लातूर, 19 मार्च : सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने दावा किया है कि बीड के सरपंच रहे संतोष देशमुख की हत्या मामले में फरार वांछित आरोपी कृष्णा अंधाले कर्नाटक सीमा के पास ‘ट्रांसजेंडर’ व्यक्तियों के बीच छिपा हुआ है. कार्यकर्ता ने कहा कि उन्होंने मंगलवार को देशमुख के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा, ‘‘अक्सर यह बताया जाता है कि अंधाले नासिक जिले में है. हाल ही में मुझे एक फोन के माध्यम से सूचना मिली कि वह कर्नाटक सीमा के पास ‘ट्रांसजेंडर’ लोगों के बीच छिपा हुआ है और उसने अपना भेष बदल लिया है.’’

कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस के कई अधिकारी पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे के करीबी सहयोगी और मुख्य आरोपी वाल्मीक कराड के प्रभाव में काम कर रहे हैं. उन्होंने पुलिस पर जबरन वसूली समेत अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया. उन्होंने मंगलवार को कहा, ‘‘मैंने इन अनियमितताओं में शामिल 26 कर्मियों की सूची पेश की है. कल मैंने सभी उपलब्ध विवरण और सबूत बीड पुलिस अधीक्षक के कार्यालय को सौंप दिए हैं.’’ उन्होंने बीड जिले में 10 वर्षों से अधिक समय से तैनात पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण की मांग की. इसके साथ कार्यकर्ता ने यह दावा किया कि प्राथमिकी के साथ हेराफेरी की गई है और उन्होंने ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. यह भी पढ़ें : निर्दोष फलस्तीनियों की हत्या से पता चलता है कि इजराइल सरकार को मानवता से कोई मतलब नहीं: प्रियंका गांधी

बीड जिले के मसाजोग गांव के सरपंच देशमुख को पिछले साल नौ दिसंबर को कथित रूप से अगवा कर लिया गया, प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई. पुलिस ने इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि अंधाले अब तक पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका है.

देसाई ने नागपुर हिंसा मामले को हैरान करने वाला करार दिया और कहा कि सरकार को कानून-व्यवस्था को बिगाड़े बिना औरंगजेब के मकबरे के मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘ईद और गुड़ी पड़वा पर्व से पहले विभाजनकारी बयानों पर अंकुश लगाया जाना चाहिए और नेताओं को भड़काऊ बयान देने से बचना चाहिए. अगर बजट सत्र के दौरान विधानसभा में यह मुद्दा उठाया गया, तो यह देशमुख की हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराधों से ध्यान हटाने का प्रयास है.’’

Share Now

\