नयी दिल्ली, 19 मार्च दिल्ली की एक अदालत आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में जेल में बंद जम्मू-कश्मीर के सांसद शेख अब्दुल रशीद उर्फ इंजीनियर रशीद की जमानत याचिका पर 21 मार्च को फैसला सुनाएगी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंद्रजीत सिंह को बुधवार को आदेश पारित करना था। हालांकि, उन्होंने फैसला टाल दिया।
न्यायाधीश ने 10 सितंबर को इंजीनियर रशीद को अंतरिम जमानत दी थी, ताकि वह जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर सकें।
न्यायाधीश ने रशीद के पिता के स्वास्थ्य के आधार पर उनकी अंतरिम जमानत अवधि 28 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने कहा था कि उसने दस्तावेजों का सत्यापन कर लिया है और आरोपी के पिता के स्वास्थ्य के आधार पर वह आवेदन का विरोध नहीं कर रही है।
रशीद पर 2017 के आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा चल रहा है।
एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद वह 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं।
नब्बे सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए चुनाव 18 सितंबर से एक अक्टूबर के बीच तीन चरणों में हुए थे।
नतीजे आठ अक्टूबर को घोषित किए गए थे, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन ने 48 सीट के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया था।
दिल्ली उच्च न्यायालय भी 25 मार्च को संसद सत्र में शामिल होने की अनुमति देने की रशीद की याचिका पर विचार कर सकता है।
रशीद ने 10 मार्च के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें चार अप्रैल तक लोकसभा की कार्यवाही में शामिल होने के लिए अभिरक्षा पैरोल या अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
एनआईए ने दलील दी थी कि रशीद को न तो अंतरिम जमानत दी जा सकती है और न ही अभिरक्षा पैरोल की अनुमति दी जा सकती है, क्योंकि हिरासत में रहते हुए उन्हें संसद सत्र में शामिल होने का कोई अधिकार नहीं है।
रशीद को एक ‘‘अत्यधिक प्रभावशाली’’ व्यक्ति बताते हुए एनआईए ने कहा, ‘‘यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती है, अगर यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि उसके खिलाफ आरोप प्रथमदृष्टया सत्य हैं।’’
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