देश की खबरें | ई-बसों की निविदा: बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली टाटा मोटर्स की याचिका खारिज

नयी दिल्ली, 19 मई उच्चतम न्यायालय ने 2,450 करोड़ रुपये मूल्य की 1,400 इलेक्ट्रिक बसों की आपूर्ति के लिए एक निविदा प्रक्रिया से टाटा मोटर्स को अयोग्य ठहराने वाले ‘बेस्ट’ के फैसले को कायम रखने संबंधी बंबई उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने संबंधी वाहन निर्माता कंपनी की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।

न्यायालय ने कहा कि वाहन निर्माता ने निविदा की आवश्यक शर्त का पालन नहीं किया।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि इसमें दो राय नहीं है कि निविदा के लिए पहली जरूरत ‘सिंगल डेकर’ बसों की निर्धारित परिचालन दूरी थी। इन बसों की बैटरी एक बार चार्ज करने पर वे (बसें) सही स्थिति में करीब 200 किमी का सफर तय करतीं।

न्ययालय ने कहा, ‘‘रिकार्ड में पेश किये गये दस्तावेज यह संकेत देते हैं कि टाटा मोटर्स ने अपनी बोली में इस जरूरी शर्त का पालन नहीं किया और बेस्ट को सूचित किया था कि वह ‘मानक परीक्षण स्थितियों’ में परिचालन दूरी को पूरा कर सकता है, जो निविदा की शर्तों के अनुरूप नहीं था।

पीठ में न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला भी शामिल हैं।

शीर्ष न्यायालय ने कहा, ‘‘ उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सही कहा है कि टाटा मोटर्स की बोली उक्त शर्त का पालन करने में नाकाम रही। टाटा मोटर्स ने निविदा की आवश्यक शर्त का पालन नहीं किया।’’

टाटा मोटर्स ने उच्च न्यायालय का रुख कर ‘बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग’ (बेस्ट) द्वारा उसे (वाहन निर्माता को) निविदा के लिए अयोग्य ठहराये जाने और हैदराबाद की कंपनी एवे ट्रांस को अनुबंध दिये जाने को चुनौती दी थी।

टाटा समूह की कंपनी ने दलील दी थी कि उसकी बोली को उस दूसरी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए मनमाने तरीके से खारिज कर दिया गया, जिसे बाद में यह अनुबंध मिला।

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