हैदराबाद, 20 दिसंबर तेलंगाना पर चालू वित्त वर्ष (2023-24) के अंत तक 6,71,757 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज होगा। प्रदेश सरकार ने बुधवार को बताया कि इसमें निगमों या संस्थानों का बिना गारंटी वाला कर्ज भी शामिल है।
वित्त वर्ष 2013-14 में राज्य पर कुल 72,658 करोड़ रुपये का कर्ज था।
सरकार द्वारा विधानसभा में तेलंगाना की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र पेश किया गया।
बुधवार को पेश सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, बजट के अंतर्गत और बजट से हटकर उधार ली गई धनराशि का ऋण चुकाने का बोझ बहुत बढ़ गया है। इसमें सरकार की कुल राजस्व प्राप्तियों का 34 प्रतिशत खर्च हो रहा है। वहीं कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर 35 प्रतिशत का खर्च हो रहा है।
चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान के अनुसार, एफआरबीएम (राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003) के तहत ऋण बढ़कर 3,89,673 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
दस्तावेजों के अनुसार, तेलंगाना में बजटीय और वास्तविक व्यय के बीच लगभग 20 प्रतिशत का अंतर है। यह आंकड़ा न केवल अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है, बल्कि संयुक्त आंध्र प्रदेश के व्यय की तुलना में भी अधिक है।
इसमें कहा गया कि नई सरकार पार्टी द्वारा दी गईं सभी छह गारंटियों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। इनकी गारंटियों पर राज्य की जनता ने बदलाव के लिए मतदान किया था।
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