चेन्नई, 12 फरवरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई ने बुधवार को राज्य की द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार से मांग की कि वह उसके उस वरिष्ठ पदाधिकारी के खिलाफ दर्ज मामले को वापस ले जिसने तिरुपति लड्डू विवाद के बाद पलानी धनदायुथपानी स्वामी मंदिर को उपलब्ध कराए जा रहे घी की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की थी।
विशेष जांच दल की ओर से दर्ज तिरुपति लड्डू मिलावट मामले में डिंडीगुल स्थित एआर डेयरी के राजशेखरन की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए भाजपा नेता नारायणन तिरुपति ने कहा कि जब पिछले साल विवाद सामने आया था, तो पार्टी की उद्योग शाखा के उपाध्यक्ष सेल्वाकुमार ने बताया था कि राजशेखरन पलानी मंदिर के न्यासी थे।
सेल्वाकुमार ने आरोप लगाया था कि लड्डू मामले में आरोपों का सामना करने वाली वही फर्म पलानी मंदिर को भी घी की आपूर्ति कर सकती थी इसलिए उन्होंने वहां गुणवत्ता जांच की मांग की थी।
नारायणन ने कहा कि सच्चाई का पता लगाने के बजाय, पुलिस ने इस मुद्दे पर सेल्वाकुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया और पार्टी पदाधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों को ‘परेशान’ किया गया।
इसके अलावा नारायणन ने दावा किया कि कुछ हफ्ते पहले राजशेखरन को द्रमुक सरकार ने पलानी मंदिर के न्यासी बोर्ड से बर्खास्त कर दिया था। अब जबकि राजशेखरन को भी तिरुपति लड्डू मामले में गिरफ्तार किया गया है, तमिलनाडु सरकार को सेल्वाकुमार के खिलाफ दर्ज मामला वापस लेना चाहिए और ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ’ रहने वाली गतिविधियों’ से बाज आना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘सेल्वाकुमार के खिलाफ कार्रवाई से यह पुष्टि होती है कि द्रविड़ मॉडल पर आधारित द्रमुक सरकार फासीवादी सरकार है। उनके खिलाफ मामला तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। अन्यथा अदालत तमिलनाडु सरकार को सच्चाई और न्याय का एहसास कराएगी।’’
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