जरुरी जानकारी | उच्चतम न्यायालय जीएम सोयाबीन के आयात के खिलाफ याचिका की सुनवाई करेगा

नयी दिल्ली, 10 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को देश में आनुवंशिक रूप से संवर्धित या जीन संवर्धित (जीएम) सोयाबीन के आयात को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

न्यायालय ने जीएम सोयाबीन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रख कर यह याचिका स्वीकार की है।

मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना एवं हिमा कोहली की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बताया कि जीएम सोयाबीन 'विषाक्त' है। इसके आयात पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जीएम सोयाबीन को बेचने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और इस संबंध में उनकी अंतरिम अपील पर जल्द सुनवाई की जाए, जो जनहित याचिका के रूप में 2005 से लंबित है।

प्रशांत भूषण के जल्द सुनवाई के अनुरोध पर पीठ ने कहा, ‘‘हम देखेंगे।’’

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने 2017 में केंद्र सरकार से अनुसंधान के आधार पर जीएम सरसों फसल को वाणिज्यिक रूप से जारी करने के प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी देने को कहा था।

केंद्र सरकार ने तब न्यायालय को बताया था कि उसने जीएम सरसों की फसल को वाणिज्यिक रूप से जारी करने पर कोई नीतिगत निर्णय नहीं लिया है और वह आंकड़ों सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है।

शीर्ष अदालत ने 17 अक्टूबर, 2016 को जीएम सरसों को वाणिज्यिक रूप से जारी करने पर रोक बढ़ा दी थी।

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