नयी दिल्ली, 28 जून दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक के मालिक आर.के. अरोड़ा को धन शोधन मामले में पूछताछ के लिए 10 जुलाई तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया।
ड्यूटी सत्र न्यायाधीश देवेंदर कुमार जांगला ने अरोड़ा से धनशोधन मामले में पूछताछ के लिये उन्हें प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया।
ईडी ने अरोड़ा की 14 दिन की हिरासत की मांग करते हुए अपने आवेदन में अदालत से कहा कि मामले में एक बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए आरोपी से पूछताछ की आवश्यकता है।
यहां ईडी कार्यालय में तीन दौर की पूछताछ के बाद अरोड़ा को मंगलवार को धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) की विभिन्न धाराओं के तहत हिरासत में ले लिया गया था।
सुपरटेक समूह, उसके निदेशकों और प्रवर्तकों के खिलाफ धनशोधन का यह मामला दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न प्राथमिकी पर आधारित है।
अदालत ने अपने हिरासत आदेश में कहा, “मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तथा पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए मेरी सुविचारित राय है कि आरोपी राम किशोर अरोड़ा की हिरासत आवश्यक है। तदनुसार, आरोपी राम किशोर अरोड़ा को 10 जुलाई, 2023 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है।”
उसने कहा, उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून के अनुसार, अरोड़ा से ऐसी जगह पर पूछताछ की जानी चाहिए जहां सीसीटीवी कवरेज हो और पूछताछ के फुटेज संरक्षित हों।
ईडी दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा सुपरटेक लिमिटेड और उसकी समूह कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी के लिए दर्ज 26 एफआईआर से संबंधित मामले की जांच कर रहा है। उन पर कम से कम 670 घर खरीदारों से 164 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है।
ईडी ने अदालत को बताया कि कंपनी और उसके निदेशक रियल एस्टेट परियोजना में बुक किए गए फ्लैटों के बदले संभावित खरीदारों से अग्रिम राशि के रूप में धन इकट्ठा करके लोगों को धोखा देने की “आपराधिक साजिश” में लिप्त थे।
उन्होंने कहा कि कंपनी समय पर फ्लैटों का कब्जा उपलब्ध कराने के सहमत दायित्व का पालन करने में विफल रही और इस तरह आम जनता को “धोखा” दिया गया।
ईडी ने दावा किया कि उसकी जांच से यह खुलासा हुआ कि सुपरटेक लिमिटेड और समूह की अन्य कंपनियों द्वारा घर खरीदारों से रकम एकत्र की गई।
एजेंसी ने कहा कि कंपनी ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से आवासीय परियोजनाओं के निर्माण के लिये परियोजना केंद्रित कर्ज भी लिया था।
उसने कहा, “इन रकम का “दुरुपयोग” समूह की अन्य कंपनियों के नाम पर जमीन खरीदने के लिए किया गया था, जिन्हें बैंकों और वित्तीय संस्थानों से धन उधार लेने के लिए गिरवी रखा गया था।”
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